मनरेगा योजना (MGNREGA Poultry Shed) ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ करने में कितनी प्रभावी है, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण ग्राम पंचायत कोदवा के हितग्राही भूलू के रूप में सामने आया है। मनरेगा अंतर्गत स्वीकृत 1.13 लाख रुपए की लागत से बने पक्के मुर्गी शेड ने न सिर्फ उनकी आय में वृद्धि की है, बल्कि कृषि कार्य में भी अतिरिक्त लाभ प्रदान किया है।
भूलू पहले से ही मुर्गी पालन करते थे, लेकिन अस्थायी शेड होने के कारण बरसात, ठंड और गर्मी के मौसम में मुर्गियों की सुरक्षा और उत्पादन क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित होती थी। दाने का संरक्षण चुनौतीपूर्ण था और चूजों की मृत्युदर भी अधिक रहती थी। मनरेगा के तहत पक्का शेड बन जाने से मुर्गियों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और अनुकूल वातावरण उपलब्ध हुआ है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है।
पक्का शेड निर्माण (MGNREGA Poultry Shed) के बाद भूलू ने 500 चूजे 25 रुपये प्रति नग की दर से खरीदे। इनमें से 60 चूजों को उन्होंने 600 रुपये प्रति नग की दर से बेच दिया, जिससे उन्हें उल्लेखनीय आमदनी प्राप्त हुई। वर्तमान में 150 से 200 चूजे अच्छी वृद्धि पर हैं। इस संपूर्ण प्रक्रिया से अब तक भूलू को लगभग ₹36,000 की आय प्राप्त हो चुकी है। पक्के शेड की संरचना के कारण चूजों की मृत्युदर में भारी कमी देखी गई है, जिससे उनकी आय और स्थिर हुई है।
विशेष रूप से मुर्गियों के पिट्स का उपयोग जैविक खाद के रूप में किया जा रहा है, जिससे भूलू को कृषि कार्य में भी अतिरिक्त लाभ मिल रहा है। यह खाद खेतों में मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में सहायक है।
वर्तमान आय और स्थिर उत्पादन को देखते हुए भूलू ने शेड का विस्तार करने के लिए समीप की भूमि खरीदने की योजना भी बनाई है। मनरेगा से निर्मित यह पक्का शेड हितग्राही के लिए आत्मनिर्भरता, आय वृद्धि और आजीविका स्थायित्व का मजबूत आधार बनकर उभरा है। यह उदाहरण दर्शाता है कि मनरेगा योजनाएं न केवल रोजगार प्रदान करती हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।


