सीजी भास्कर, 27 जून : छत्तीसगढ़ के राजकीय पशु वन भैंसा के संरक्षण के लिए (AI Wild Buffalo Monitoring) के तहत इंद्रावती टाइगर रिजर्व (ITR) में आधुनिक तकनीक और स्थानीय युवाओं की भागीदारी पर आधारित नई पहल शुरू की गई है। वर्तमान में वन भैंसा विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुका है और रिजर्व क्षेत्र में इसकी संख्या केवल 10 से 15 के बीच होने का अनुमान है। ऐसे में वन विभाग ने ‘वन भैंसा मित्र’ कार्यक्रम के माध्यम से आदिवासी युवाओं को संरक्षण अभियान से जोड़ते हुए उन्हें कैमरा ट्रैप, जीपीएस ट्रैकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी का प्रशिक्षण देना शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य वन भैंसों की सुरक्षा को मजबूत करना, वैज्ञानिक डेटा एकत्र करना तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के अवसर तैयार करना है।
इंद्रावती टाइगर रिजर्व बना वन भैंसों का सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास
(AI Wild Buffalo Monitoring) अभियान के तहत इंद्रावती टाइगर रिजर्व को देश में शुद्ध नस्ल के वन भैंसों का सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास माना जा रहा है। पश्चिम और मध्य भारत में यह क्षेत्र वन भैंसा संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) ने वन भैंसा को संकटग्रस्त प्रजातियों की सूची में शामिल किया है, जबकि भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत इसे सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है। इसके बावजूद लगातार घटती संख्या वन विभाग और संरक्षण विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
AI कैमरा, GPS ट्रैकिंग और कैमरा ट्रैप से होगी वैज्ञानिक निगरानी
(AI Wild Buffalo Monitoring) के अंतर्गत वर्ष 2025 में वन विभाग, नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी, वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट (WCT) तथा हैदराबाद के तकनीकी विशेषज्ञों के सहयोग से ‘वन भैंसा मित्र’ कार्यक्रम शुरू किया गया। इसके तहत बीजापुर जिले के स्थानीय आदिवासी युवाओं को छह माह का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में कैमरा ट्रैप लगाना, जीपीएस आधारित लोकेशन ट्रैकिंग, वन्यजीवों की गतिविधियों का वैज्ञानिक रिकॉर्ड तैयार करना तथा AI तकनीक के माध्यम से डेटा विश्लेषण करना सिखाया जा रहा है। इससे वन भैंसों की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे प्रभावी निगरानी संभव हो सकेगी।
मल और जैविक नमूनों से होगी आनुवंशिक पहचान
(AI Wild Buffalo Monitoring) परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा आनुवंशिक अध्ययन भी है। प्रशिक्षित युवा वन भैंसों के मल तथा अन्य जैविक नमूने एकत्र करेंगे, जिनकी वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में जांच कराई जाएगी। इससे वन भैंसों की शुद्ध नस्ल, स्वास्थ्य स्थिति, वास्तविक संख्या तथा प्रजनन क्षमता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस वैज्ञानिक अध्ययन से भविष्य की संरक्षण रणनीति अधिक प्रभावी बनाई जा सकेगी।
स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार और संरक्षण की जिम्मेदारी
‘वन भैंसा मित्र’ कार्यक्रम के माध्यम से स्थानीय युवाओं को केवल प्रशिक्षण ही नहीं दिया जा रहा, बल्कि उन्हें संरक्षण गतिविधियों का सक्रिय भागीदार भी बनाया जा रहा है। इससे एक ओर वन्यजीव संरक्षण को स्थानीय स्तर पर मजबूती मिलेगी, वहीं दूसरी ओर युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास और आजीविका के नए अवसर भी तैयार होंगे। वन विभाग का मानना है कि स्थानीय समुदाय की भागीदारी से संरक्षण अभियान अधिक प्रभावी और टिकाऊ साबित होगा।
अधिकारियों ने बताया भविष्य के लिए महत्वपूर्ण कदम
इंद्रावती टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर स्टाइलो मंडावी ने कहा कि यदि (AI Wild Buffalo Monitoring) अभियान को लगातार वैज्ञानिक सहयोग और स्थानीय समुदाय का समर्थन मिलता रहा, तो इंद्रावती टाइगर रिजर्व देश में कम्युनिटी आधारित वन्यजीव संरक्षण का आदर्श मॉडल बन सकता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय युवाओं की भागीदारी वन भैंसा संरक्षण की सबसे बड़ी ताकत बनेगी और इससे संकटग्रस्त प्रजाति को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिल सकती है।



