सीजी भास्कर, 9 सितंबर। छत्तीसगढ़ के पर्वतारोहण इतिहास में आज स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। जशपुर (Mountaineering Expedition Jashpur)जिले के पांच जनजातीय युवा पर्वतारोही हिमाचल प्रदेश स्थित दुहंगन ग्लेशियर क्षेत्र के लिए रवाना हुए हैं। यह 18 दिवसीय उच्च हिमालयी प्रशिक्षण और पर्वतारोहण अभियान (Mountaineering Expedition) न केवल साहस और रोमांच की परीक्षा है, बल्कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विज़न का हिस्सा भी है, जिसमें जनजातीय युवाओं को नए अवसरों से जोड़ने और वैश्विक पहचान दिलाने का संकल्प लिया गया है।
जशपुर की धरती से हिमालय तक
टीम में शामिल साजन टोप्पो, संजीव कुजूर, प्रतीक एक्का, मनीष नायक और अजीत लकड़ा—सभी जशपुर(Mountaineering Expedition Jashpur) की जनजातीय पृष्ठभूमि से हैं। इनका सफर यह संदेश देता है कि गाँवों और जंगलों से निकलकर भी युवा दुनिया की सबसे कठिन चोटियों को फतह कर सकते हैं। यह अभियान न सिर्फ जशपुर बल्कि पूरे प्रदेश के युवाओं को दिखा रहा है कि सपनों की उड़ान की कोई सीमा नहीं होती।
मुख्यमंत्री का आशीर्वाद और सरकारी सहयोग
यह मिशन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उस नीति से जुड़ा है, जिसके तहत साहसिक खेलों को बढ़ावा देना और जनजातीय युवाओं को अवसर प्रदान करना शामिल है। उन्होंने रवाना होने से पहले टीम को शुभकामनाएं दीं। राज्य सरकार और विभिन्न संस्थानों के सहयोग से यह दल हिमालय की ओर प्रस्थान कर चुका है।
अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहियों का मार्गदर्शन
इस अभियान में स्पेन, अमेरिका और भारत के विश्वस्तरीय पर्वतारोही और गाइड टीम के साथ रहेंगे। वे बर्फीली चोटियों और ग्लेशियरों पर चढ़ाई के साथ-साथ नए पर्वतारोहण मार्ग (Adventure Sports Training) खोलने में भी सहयोग देंगे। यह अनुभव आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के युवाओं को प्रोफेशनल एडवेंचर स्पोर्ट्स और साहसिक पर्यटन की दिशा में मजबूत आधार देगा।
प्रेरणा और पर्यावरण संदेश
यह चढ़ाई जशपुर और छत्तीसगढ़ के युवाओं को यह विश्वास दिलाएगी कि साहसिक खेलों में भी करियर और पहचान बनाई जा सकती है। टीम हिमालय तक पर्यावरण संरक्षण (Environmental Awareness) और स्वच्छ भारत मिशन का संदेश भी लेकर जाएगी। रवाना होने से पहले पर्वतारोहियों ने जशपुर के प्रसिद्ध मधेश्वर धाम में पूजा-अर्चना की और सफलता का आशीर्वाद लिया।
यह अभियान केवल एक पर्वतारोहण यात्रा नहीं, बल्कि जनजातीय शक्ति, मुख्यमंत्री का विज़न, पर्यावरणीय संदेश और साहस का संगम है। आने वाली पीढ़ियों को यह प्रेरणा देगा कि हिमालय ही नहीं, उनके सपने भी उतने ही ऊँचे और बुलंद हो सकते हैं।



