सीजी भास्कर, 15 जून। शहर में वर्षों पहले बेरोजगारों को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से तैयार की गई दुकानों की हालत अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन (Municipal Shops) गई है। जिन परिसरों में कभी कारोबार शुरू होने और रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद थी, वहां आज सन्नाटा पसरा हुआ है। कई स्थानों पर दुकानें उपयोग के अभाव में धीरे धीरे जर्जर होती जा रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए ढांचे का पूरा लाभ न तो जरूरतमंदों को मिल पाया और न ही इससे नगर निकाय को अपेक्षित राजस्व प्राप्त हुआ। लंबे समय से खाली पड़ी दुकानों की स्थिति देखकर लोगों में नाराजगी भी बढ़ रही है।
सवा सौ से अधिक दुकानों का नहीं हुआ आवंटन : Municipal Shops
नगर निगम द्वारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में दुकानें तैयार की गई थीं, ताकि बेरोजगार युवाओं और छोटे व्यापारियों को व्यवसाय का अवसर मिल सके। लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी 122 से अधिक दुकानों का आवंटन नहीं हो पाया है। जानकारी के अनुसार कई जरूरतमंदों द्वारा आवेदन दिए जाने के बावजूद इन दुकानों का उपयोग शुरू नहीं हो सका। नतीजतन बड़ी संख्या में दुकानें खाली पड़ी हुई हैं।
कई इलाकों में खड़ी हैं खाली दुकानें
शहर के हाईटेक बस स्टैंड क्षेत्र में 38 दुकानें बनाई गई थीं। इसके अलावा रेलवे स्टेशन मार्ग, पुराने सफाई कार्यालय परिसर, नया बस स्टैंड, टांकाघर क्षेत्र, गंज चौक, भैसा कोठा और महावीर चौक सहित कई स्थानों पर भी दुकान परिसरों का निर्माण कराया गया। इनमें से अनेक दुकानों का आज तक उपयोग नहीं हो पाया है। लंबे समय से खाली रहने के कारण कई जगहों पर भवनों की हालत खराब होने लगी है।
करोड़ों की संपत्ति बेकार
वर्ष 2016 में करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए हाईटेक बस स्टैंड और उससे जुड़े व्यावसायिक परिसरों से रोजगार और आय बढ़ने की उम्मीद थी। लेकिन कई दुकानें अब भी बंद पड़ी हैं। कुछ स्थानों पर तो स्थिति ऐसी हो गई है कि खाली परिसरों का उपयोग मवेशियों के ठहरने की जगह के रूप में होने (Municipal Shops) लगा है, जिससे सरकारी संपत्ति की उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं।
राजस्व का भी नहीं मिला लाभ
दुकानों के निर्माण पर बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद नगर निगम को अपेक्षित आय नहीं मिल सकी। जिन दुकानों का आवंटन हुआ है, वहां भी राजस्व वसूली और अनुबंध संबंधी प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। नियमों के अनुसार निर्धारित समय में अनुबंध नहीं होने पर आवंटन निरस्त करने और जमा राशि जब्त करने का प्रावधान है, लेकिन इस दिशा में प्रभावी कार्रवाई नहीं होने की बात सामने आ रही है।
लोगों ने उठाए सवाल
लंबे समय से खाली पड़ी दुकानों को देखकर नागरिक अब सवाल उठा रहे हैं कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई संपत्तियों का उपयोग (Municipal Shops) कब होगा। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते दुकानों का आवंटन कर दिया जाए तो इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और नगर निगम को राजस्व भी प्राप्त होगा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि खाली पड़ी परिसंपत्तियों को उपयोग में लाने के लिए जल्द ठोस कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि सार्वजनिक धन का उद्देश्य पूरा हो सके।





