सीजी भास्कर, 05 अगस्त। सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव के मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ (12 Jyotirlinga) उमड़ती है। श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर पूजा-अर्चना करते हैं। वहीं, देश के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन और जलाभिषेक का भी विशेष महत्व माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सामान्य शिवलिंग और ज्योतिर्लिंग में क्या अंतर होता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दोनों ही भगवान शिव के स्वरूप हैं। हालांकि, उनकी उत्पत्ति, महत्व और धार्मिक मान्यता अलग-अलग मानी जाती है। आइए आसान भाषा में समझते हैं।

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Jyotirlinga की उत्पत्ति कैसे हुई? 12 Jyotirlinga
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ। उसी समय भगवान शिव अनंत प्रकाश स्तंभ यानी दिव्य ज्योति के रूप में प्रकट हुए।
भगवान शिव ने दोनों देवताओं से उस ज्योति का आदि और अंत खोजने को कहा, लेकिन कोई भी इसकी सीमा तक नहीं पहुंच सका। इसके बाद दोनों ने भगवान शिव की सर्वोच्च सत्ता को स्वीकार किया। मान्यता है कि इसी दिव्य ज्योति के अंश पृथ्वी पर 12 स्थानों पर प्रकट हुए, जिन्हें 12 ज्योतिर्लिंग कहा जाता है।
सामान्य शिवलिंग क्या होता है?
सामान्य शिवलिंग मंदिरों और घरों में स्थापित किए जाते हैं। इन्हें पत्थर, धातु, मिट्टी, संगमरमर, स्फटिक या अन्य पदार्थों से बनाया जाता है। धार्मिक विधि से प्राण-प्रतिष्ठा और मंत्रोच्चार के बाद इनमें भगवान शिव का आह्वान किया जाता है। नियमित पूजा, अभिषेक और मंत्र जाप से इनका धार्मिक महत्व बना रहता है।
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ज्योतिर्लिंग क्यों माने जाते हैं विशेष?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्योतिर्लिंग मानव निर्मित (12 Jyotirlinga) नहीं हैं। इन्हें भगवान शिव का स्वयंभू और दिव्य स्वरूप माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इन पवित्र स्थलों पर भगवान शिव की विशेष दिव्य ऊर्जा विद्यमान रहती है। इसलिए यहां दर्शन और जलाभिषेक को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
शिवलिंग और ज्योतिर्लिंग में क्या अंतर है?
सामान्य शिवलिंग: मनुष्य द्वारा बनाए और स्थापित किए जाते हैं।
ज्योतिर्लिंग: भगवान शिव के स्वयंभू और दिव्य स्वरूप माने जाते हैं।
सामान्य शिवलिंग: प्राण-प्रतिष्ठा के बाद पूजा का केंद्र बनते हैं।
ज्योतिर्लिंग: अनादि, स्वयं जाग्रत और विशेष धार्मिक महत्व वाले माने जाते हैं।
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भारत के 12 ज्योतिर्लिंग
सोमनाथ – गुजरात
मल्लिकार्जुन – आंध्र प्रदेश
महाकालेश्वर – उज्जैन, मध्य प्रदेश
ओंकारेश्वर – मध्य प्रदेश
केदारनाथ – उत्तराखंड
भीमाशंकर – महाराष्ट्र
काशी विश्वनाथ – वाराणसी, उत्तर प्रदेश
त्र्यंबकेश्वर – महाराष्ट्र
बैद्यनाथ धाम – झारखंड
नागेश्वर – गुजरात
रामेश्वरम – तमिलनाडु
घृष्णेश्वर – महाराष्ट्र
धार्मिक मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, जलाभिषेक और श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त (12 Jyotirlinga) होती है। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य शिव पर्वों पर इन पवित्र धामों का महत्व और भी बढ़ जाता है।
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