सीजी भास्कर 30 नवंबर National Herald New FIR: राष्ट्रीय राजधानी में नेशनल हेराल्ड केस एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। आर्थिक अपराध शाखा ने 3 अक्टूबर को मिली ईडी की विस्तृत शिकायत के आधार पर कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत कई लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज कर ली है।
इस प्राथमिकी में कुल छह व्यक्तियों के नाम और तीन कंपनियों को भी आरोपी बनाया गया है — इनमें से मुख्य आरोप यह है कि AJL को कथित रूप से एक नियोजित साजिश (Criminal Conspiracy) के जरिए अपने प्रभाव में लेने की कोशिश हुई।
National Herald New FIR: FIR में और कौन-कौन शामिल?
PMLA की धारा 66(2) के तहत किसी भी एजेंसी से अनुसूचित अपराध दर्ज करने की अनुशंसा की जा सकती है। इसी प्रक्रिया के तहत जिन नामों को FIR में शामिल किया गया है, उनमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा के साथ तीन अन्य प्रमुख पदाधिकारी शामिल बताए गए हैं।
इसके अलावा AJL, Young Indian, और Dotex Merchandise Pvt. Ltd.—ये तीन कंपनियां भी मामले में सीधे तौर पर आरोपी के रूप में दर्ज हैं।
EOW का कहना है कि उनकी टीम अब AJL के पुराने और वर्तमान शेयरधारकों से भी पूछताछ कर सकती है।
विवादित Deal: 50 लाख के बदले 2,000 करोड़ की संपत्ति?
नेशनल हेराल्ड विवाद कोई नया मुद्दा नहीं है। इसकी जड़ें उस अखबार से जुड़ी हैं, जो 1938 में शुरू हुआ था और जिसे लंबे समय तक एक ऐतिहासिक राजनीतिक धरोहर माना जाता रहा।
आरोप लगाने वाले पक्ष का दावा है कि AJL के नाम पर दिल्ली, लखनऊ, मुंबई समेत अन्य शहरों में करीब दो हजार करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियाँ थीं।
मामला इस वजह से उलझा कि इन संपत्तियों को कथित तौर पर सिर्फ 50 लाख रुपये की रकम पर एक संस्थान को स्थानांतरित कर दिया गया।
यही बिंदु इस पूरे केस को सबसे ज्यादा विवादास्पद बनाता है और यहीं से राजनीतिक हमला-प्रत्याक्रमण का दौर तेज होता है।
National Herald New FIR: कांग्रेस का जवाब: ‘पूरी तरह राजनीतिक प्रेरित कार्रवाई’
कांग्रेस ने इन आरोपों को बार-बार सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि यह मामला राजनीतिक दृष्टि से प्रेरित है और इन आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि Young Indian द्वारा AJL को सहायता देने का उद्देश्य केवल वित्तीय पुनर्संरचना (Financial Reorganisation) था, न कि कोई अनुचित लाभ उठाना।
फिलहाल इस मुद्दे पर कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ वकीलों से सलाह लेकर कानूनी रणनीति तेज कर दी है।
आगे क्या? कोर्ट की अगली सुनवाई पर निगाहें
EOW की FIR दर्ज होने के बाद अब अगला चरण कोर्ट में होगा।
ईडी द्वारा दायर की गई चार्जशीट पहले से ही विचाराधीन है और उसके आधार पर अगली सुनवाई में कुछ अहम दिशा-निर्देश मिल सकते हैं।
राजनीतिक तौर पर भी इस FIR ने एक नया मोड़ जोड़ दिया है—जहाँ विपक्ष इसे सत्ता पक्ष की “कानूनी आड़ में राजनीतिक कार्रवाई” बता रहा है, वहीं सत्ताधारी खेमे का कहना है कि यह “कानून का सामान्य प्रवर्तन” है।
