🔹 माओवाद के खिलाफ सबसे बड़ी जीत, बस्तर में दिखा बदलाव का असर
🔹 एक करोड़ इनामी रूपेश समेत 218 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया
🔹 सरकार देगी मकान, जमीन और तीन साल तक आर्थिक सहायता : सीएम साय
सीजी भास्कर, 17 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ में दो दशकों से (Naxal Terror Bastar) फैले लाल आतंक के अंत की दिशा में आज एक ऐतिहासिक दिन दर्ज हुआ। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा मार्च 2026 तक माओवाद खत्म करने की तय (Naxal Eradication Deadline) से पहले ही प्रदेश में माओवादी हिंसा का अध्याय लगभग समाप्त होता दिखाई दे रहा है।
शुक्रवार को जगदलपुर पुलिस लाइन परिसर में आयोजित कार्यक्रम में 218 नक्सलियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समक्ष आत्मसमर्पण (Naxal Terror Bastar) किया। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का स्वागत संविधान की प्रति और एक गुलाब भेंटकर किया गया। यह बस्तर की नई सुबह का प्रतीक बन गया। सरेंडर कार्यक्रम स्थल तक नक्सलियों को 3 बसों से लाया गया, जिनमें महिला नक्सलियों की संख्या पुरुषों से अधिक रही।
अब बस्तर में विकास की ज्योति जल चुकी है
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को (Rehabilitation Policy Chhattisgarh) के तहत तीन साल तक आर्थिक सहायता दी जाएगी। प्रत्येक को मकान और आजीविका के लिए जमीन उपलब्ध कराई जाएगी ताकि वे सम्मानजनक जीवन की ओर लौट सकें।
उन्होंने कहा “हमारे ये भाई-बहन अब विकास की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। उन्हें संविधान की प्रति दी गई है ताकि वे लोकतंत्र की भावना को समझें और अपनाएं। बस्तर अब बदल रहा है सड़कें बन रही हैं, बिजली हर घर तक पहुंच रही है, और राज्य सरकार हर गांव को विकास की राह पर ले जा रही है।”
एक करोड़ इनामी रूपेश भी हुआ सरेंडर
आत्मसमर्पण करने वालों में सेंट्रल कमेटी मेंबर सतीश उर्फ टी. वासुदेव राव उर्फ रूपेश (Most Wanted Maoist Rupees 1 Crore Reward) भी शामिल था। रूपेश माड़ डिवीजन में सक्रिय था और उस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। अन्य नक्सलियों पर 5 लाख से 25 लाख रुपये तक के इनाम थे। कार्यक्रम में सीएम के साथ डिप्टी सीएम विजय शर्मा और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आत्मसमर्पण केवल हथियारों का नहीं, बल्कि विचारों का परिवर्तन है — “अब बस्तर में बंदूक नहीं, विश्वास की शक्ति जीत रही है।”
पुनर्वास नीति से जीवन को नई दिशा
डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह द्वारा तय लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद की समाप्ति (End of Naxalism Target 2026) अब लगभग सुनिश्चित है। उन्होंने बताया कि पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित नक्सलियों को मेडिकल, शिक्षा और स्वरोजगार सहायता दी जाएगी। उन्होंने कहा “जो नक्सली अपने परिवार या माता-पिता से वर्षों तक दूर रहे, सरकार उन्हें न केवल पुनर्वास देगी बल्कि चिकित्सा सुविधा तक उपलब्ध कराएगी।
अब हर हथियार डालने वाला, विकास का सहयोगी बनेगा।” शर्मा ने यह भी बताया कि इस आत्मसमर्पण में माड़ डिवीजन की पूरी कमेटी शामिल थी, जबकि गढ़चिरौली यूनिट अपने क्षेत्र में लौट चुकी है। केवल केशकाल यूनिट अब शेष है।
सरेंडर स्थल पर जब नक्सलियों को संविधान की प्रति और गुलाब दिया गया तो माहौल भावनात्मक हो उठा। एक-एक चेहरे पर सुकून और नई शुरुआत की झलक थी। यह आयोजन (Naxal Rehabilitation Success Bastar) का ऐसा क्षण बना जिसे बस्तर हमेशा याद रखेगा।



