सीजी भास्कर, 07 जुलाई। नवा रायपुर क्षेत्र के नकटी गांव में हुई तोड़फोड़ और बस्ती हटाने की कार्रवाई को लेकर सियासत तेज हो गई है। पूर्व मंत्री धनेंद्र साहू ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाते हुए दावा किया कि 1930-31 की चकबंदी रिपोर्ट से लेकर वर्ष 2024 तक के सरकारी दस्तावेज ग्रामीणों के पक्ष में हैं, इसके बावजूद भारी पुलिस बल की मौजूदगी में छुट्टी के दिन सुबह-सुबह बस्ती हटाने की कार्रवाई की गई। (Naya Raipur Nakti Village Demolition)
‘ग्रामीणों के पक्ष में हैं सरकारी रिकॉर्ड’ : Naya Raipur Nakti Village Demolition
धनेंद्र साहू ने कहा कि उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड और पुराने सरकारी दस्तावेज स्पष्ट रूप से ग्रामीणों के अधिकारों की ओर इशारा करते हैं। इसके बावजूद प्रशासन ने बिना उचित न्यायिक प्रक्रिया के बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर बस्तीवासियों को हटाया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई।
‘भू-माफियाओं को फायदा पहुंचाने की साजिश?’
पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि पूरे घटनाक्रम के पीछे कहीं नवा रायपुर के नकटी गांव की जमीन पर भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाने की मंशा तो नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच करानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
2024 का आवास सचिव का पत्र दिखाकर सरकार को घेरा : Naya Raipur Nakti Village Demolition
धनेंद्र साहू ने अक्टूबर 2024 में आवास सचिव द्वारा रायपुर कलेक्टर को लिखे गए पत्र का हवाला देते हुए कहा कि इसमें खसरा नंबर 460, 465, 524, 698, 700 और 701 की कुल 29.172 हेक्टेयर भूमि आवंटन के लिए उपलब्ध कराने का उल्लेख है।
उन्होंने बताया कि पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि संबंधित भूमि पर कच्चे और पक्के मकान बने हुए हैं तथा लगातार अतिक्रमण बढ़ रहा है, जिससे विशेष आवासीय योजना के तहत जनप्रतिनिधियों को भूखंड आवंटित करने में बाधा आ रही है। इसलिए अतिक्रमण हटाकर भूमि शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे।
‘गृह मंडल अध्यक्ष के बयान और पत्र में विरोधाभास’
पूर्व मंत्री ने कहा कि एक ओर गृह मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव यह कहते हैं कि मंडल ने कोई जमीन नहीं मांगी, जबकि आवास सचिव के पत्र में भूमि उपलब्ध कराने की मांग स्पष्ट रूप से दर्ज है। उन्होंने कहा कि दोनों बयानों में स्पष्ट विरोधाभास दिखाई देता है।



