सीजी भास्कर, 12 अगस्त। बिलासपुर में नीट परीक्षा के अंकों को लेकर दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट के फैसले के बाद तस्वीर (NEET OMR) साफ हो गई। सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले की 21 वर्षीय छात्रा पीहू सिंह ने कम अंक आने और ओएमआर शीट में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई के दौरान जब परीक्षा की मूल ओएमआर शीट अदालत के सामने रखी गई, तो उसमें दर्ज जवाबों के आधार पर छात्रा के 159 अंक ही सही पाए गए।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की पीठ ने की। अदालत ने मूल ओएमआर शीट का खुद अवलोकन किया और उसमें दर्ज उत्तरों की जांच की। जांच के बाद परिणाम और मूल ओएमआर शीट के बीच कोई अंतर नहीं मिला। इसके बाद अदालत ने छात्रा की याचिका खारिज कर दी।

यह भी पढ़ें : Brother Murder : चॉइस सेंटर के हिसाब को लेकर विवाद, भाई ने कुल्हाड़ी मार कर दी हत्या
मूल ओएमआर शीट से सामने आया सच NEET OMR
छात्रा ने 21 जून 2026 को नीट यूजी परीक्षा दी थी। परिणाम जारी होने पर उसे 159 अंक मिले। छात्रा का कहना था कि उसने इससे ज्यादा सवालों के जवाब दिए थे और उसे उम्मीद से कम अंक मिले हैं। इसी आधार पर उसने ओएमआर शीट में कथित गड़बड़ी की जांच की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
सुनवाई के दौरान अदालत ने परीक्षा कराने वाली एजेंसी को छात्रा की मूल ओएमआर शीट पेश करने का निर्देश दिया। 10 अगस्त को संबंधित अधिकारी ने मूल ओएमआर शीट अदालत के सामने रखी। इसके बाद बेंच ने दस्तावेज का बारीकी से परीक्षण किया।
180 में सिर्फ 71 सवालों के जवाब
अदालत की जांच में सामने आया कि 180 प्रश्नों वाली परीक्षा में छात्रा ने मूल ओएमआर शीट पर केवल 71 प्रश्नों के उत्तर दर्ज किए थे। इनमें 46 उत्तर सही पाए गए, जबकि 25 उत्तर गलत थे।
अदालत ने इन्हीं दर्ज उत्तरों के आधार पर अंक की गणना की। जांच में छात्रा के 159 अंक ही बन रहे थे। यानी परीक्षा परिणाम में दर्ज अंक और मूल ओएमआर शीट के उत्तरों के बीच कोई विसंगति नहीं मिली।
यह भी पढ़ें : Durg Youth Death Case : गर्लफ्रेंड के घर की छत पर मिला युवक का शव, शराब पार्टी के बाद हुआ था विवाद
सभी सवाल हल करने के दावे को नहीं माना आधार NEET OMR
सुनवाई के दौरान छात्रा की ओर से कहा गया कि उसने परीक्षा में सभी प्रश्न हल किए थे। हालांकि अदालत ने इस दावे को मूल ओएमआर शीट में दर्ज जानकारी के सामने पर्याप्त नहीं माना।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परीक्षा के दौरान अभ्यर्थी ने मूल ओएमआर शीट में जो उत्तर दर्ज किए हैं, वही उसके वास्तविक उत्तर माने जाएंगे। टेस्ट बुकलेट में मौजूद उत्तर या परीक्षा के बाद अभ्यर्थी की ओर से बताए गए जवाब मूल ओएमआर शीट में दर्ज उत्तरों का विकल्प नहीं हो सकते।
यह भी पढ़ें : Jashpur Murder Case : पहाड़ी कोरवा युवक की हत्या, पिता-पुत्र ने पत्थर से किया हमला
परिणाम में नहीं मिली कोई गड़बड़ी
हाईकोर्ट ने माना कि मूल ओएमआर शीट और परीक्षा परिणाम के बीच किसी तरह की विसंगति सामने (NEET OMR) नहीं आई है। ओएमआर शीट पर दर्ज उत्तरों के अनुसार 159 अंक सही पाए गए।
अदालत ने यह भी साफ किया कि किसी प्रतियोगी परीक्षा के परिणाम को चुनौती देने के लिए केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि अभ्यर्थी ने ज्यादा प्रश्न हल किए थे। जब तक मूल ओएमआर शीट में दर्ज उत्तरों और जारी परिणाम के बीच कोई ठोस अंतर सामने नहीं आता, सिर्फ दावे के आधार पर परिणाम में बदलाव नहीं किया जा सकता।
इन सभी तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने पीहू सिंह की याचिका खारिज कर दी। अदालत के फैसले के बाद इस मामले में ओएमआर शीट को ही अंतिम और विश्वसनीय आधार माना गया है।
खबरें और भी हैं :Solar Eclipse 2026 : आज का सूर्य ग्रहण क्यों है खास, जानें किन बातों का रखें ध्यान




