सीजी भास्कर, 10 मई। रविवार से शुरू हुए रोग पंचक को लेकर मंदिरों और ज्योतिष केंद्रों में लोगों की आवाजाही (Panchak Upay) बढ़ गई है। कई लोग सुबह से ही पंचक के प्रभाव और उससे बचने के उपाय जानने पहुंचे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रोग पंचक के दौरान स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ने की आशंका मानी जाती है, इसी वजह से लोग पूजा पाठ और विशेष उपायों में जुटे दिखाई दिए।
घरों में भी कई परिवारों ने धार्मिक नियमों का पालन शुरू कर दिया है। कुछ लोग शुभ कार्यों को टालने की बात कर रहे हैं तो कई लोग महामृत्युंजय मंत्र और हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं। पंचक को लेकर ज्योतिषाचार्यों के पास भी लोगों के सवाल लगातार बढ़ रहे हैं।
15 मई तक रहेगा रोग पंचक : Panchak Upay
धार्मिक मान्यता के अनुसार 10 मई से पंचक की शुरुआत हो चुकी है, जो 15 मई तक रहेगा। क्योंकि यह पंचक रविवार से शुरू हुआ है, इसलिए इसे रोग पंचक कहा जा रहा है। मान्यता है कि इस दौरान व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसी वजह से इस समय विशेष सावधानी रखने की सलाह दी जाती है।
महामृत्युंजय मंत्र का करें जाप
रोग पंचक के दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना शुभ माना गया है। मान्यता है कि इससे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का खतरा कम होता है और मानसिक शांति मिलती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार नियमित मंत्र जाप से नकारात्मक प्रभावों को कम करने में मदद मिलती है।
सूर्य देव को जल चढ़ाने की सलाह
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार रोग पंचक में रोज सुबह सूर्य देव को जल अर्पित करना लाभकारी (Panchak Upay) माना गया है। तांबे के लोटे में जल, रोली और लाल चंदन डालकर अर्घ्य देने की सलाह दी गई है। मान्यता है कि इससे आरोग्य और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। कई लोग सुबह मंदिरों और घरों में यह उपाय करते नजर आए।
दान और पाठ को माना गया शुभ
रोग पंचक के दौरान गुड़, गेहूं और तांबे की वस्तुओं का दान करना शुभ बताया गया है। इसके साथ ही हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करने की भी सलाह दी गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे पंचक के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और मन में सकारात्मकता बनी रहती है।
इन कामों से बचने की सलाह
पंचक के दौरान कुछ कार्यों को वर्जित माना गया है। मान्यता के अनुसार इस समय लकड़ी इकट्ठा करना, नई चारपाई बनवाना और घर की छत डालना शुभ नहीं (Panchak Upay) माना जाता। इसके अलावा दक्षिण दिशा की यात्रा से बचने की भी सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिशा यम की दिशा मानी गई है।


