सीजी भास्कर, 06 जुलाई : बलरामपुर जिले का शंकरगढ़ क्षेत्र अब नाशपाती उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरकर सामने आया है। नाशपाती खेती बलरामपुर (Pear Farming Balrampur) के जरिए कभी पथरीली और बंजर जमीन पर पारंपरिक खेती करने वाले किसान अब बागवानी से बेहतर आमदनी हासिल कर रहे हैं। वर्तमान में क्षेत्र के करीब 1000 एकड़ में फलदार बगीचे विकसित हो चुके हैं, जिससे एक हजार से अधिक किसान परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
वाड़ी विकास कार्यक्रम से मिली नई पहचान
क्षेत्र में नाशपाती खेती बलरामपुर (Pear Farming Balrampur) की शुरुआत वर्ष 2013-14 में हुई थी। रूरल एजुकेशन एंड डेवलपमेंट सोसाइटी ने राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के सहयोग से वाड़ी विकास कार्यक्रम के तहत किसानों को फलदार पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया। शुरुआती संकोच के बाद वर्ष 2018-19 से पौधों में फल आने लगे और यह पहल सफल साबित हुई।
कई गांवों में बड़े पैमाने पर हो रहा उत्पादन
वर्तमान में देवसारा, लारंगी, भगवतपुर, भुवनेश्वरपुर और जारहाडीह गांवों में बड़े पैमाने पर नाशपाती की तुड़ाई और बिक्री की जा रही है। नाशपाती खेती बलरामपुर (Pear Farming Balrampur) के तहत किसान आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग करते हुए आम और नाशपाती के पेड़ों के बीच खाली भूमि में अन्य फसलें भी उगा रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय का लाभ मिल रहा है।
सालाना 50 हजार से 1 लाख रुपये तक शुद्ध आय
फलों की खेती ने किसानों की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव लाया है। प्रति एकड़ आम और नाशपाती की खेती से किसानों को 50 हजार से 1 लाख रुपये तक की शुद्ध आय हो रही है। बेहतर आमदनी के चलते कई किसानों ने ट्रैक्टर और पिकअप जैसे कृषि उपयोगी वाहन भी खरीदे हैं, जिससे खेती का दायरा और उत्पादन क्षमता लगातार बढ़ रही है। नाशपाती खेती बलरामपुर (Pear Farming Balrampur) अब क्षेत्र के किसानों के लिए आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बनती जा रही है।



