सीजी भास्कर, 20 अप्रैल : भारतीय जनता पार्टी जिला भिलाई में गुटबाजी और असंतोष (Political Internal Conflict) का ज्वालामुखी फूट पड़ा है। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के जिलाध्यक्ष द्वारा घोषित कार्यकारिणी को लेकर पार्टी के भीतर ही विद्रोह की स्थिति निर्मित हो गई है। जिले में गहराता यह राजनीतिक आंतरिक संघर्ष उस समय सतह पर आ गया, जब 13 में से 10 मंडल अध्यक्षों ने जिलाध्यक्ष की सूची को चुनौती देते हुए अपनी अलग ‘समांतर’ कार्यकारिणी घोषित कर दी।

पैनल को दरकिनार करने पर भड़का आक्रोश
विवाद की मुख्य जड़ संगठन की लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अनदेखी करना बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, परंपरा के मुताबिक भाजपा के मंडल अध्यक्षों से युवा मोर्चा के पदाधिकारियों के लिए नामों का पैनल मंगाया गया था। आरोप है कि जिलाध्यक्ष सौरभ जायसवाल ने मंडल अध्यक्षों के सुझावों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। कार्यकर्ताओं का दावा है कि यह पूरी कवायद एक ‘विशेष बंगले’ के इशारे पर की गई है, जिससे संगठन के भीतर का (Political Internal Conflict) अब सड़कों पर नजर आने लगा है।

‘अक्रिय’ और ‘दागी’ चेहरों पर सवाल
निष्ठावान कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर सबसे ज्यादा गुस्सा है कि सूची में उन चेहरों को जगह दी गई है जो कभी संगठन की गतिविधियों में सक्रिय नहीं रहे। चर्चा तो यहाँ तक है कि कुछ नवनियुक्त पदाधिकारियों पर आपराधिक मामले भी दर्ज हैं। मंडल अध्यक्षों का साफ कहना है कि उन्हें चुनाव और संगठन के काम के लिए सक्रिय टीम चाहिए, न कि ‘रेवड़ियों’ की तरह बांटे गए पद।

एक जिला, दो-दो अध्यक्ष
भिलाई-चरौदा, कोहका, वैशाली नगर और सुपेला सहित 10 मंडलों में अब स्थिति यह है कि भाजयुमो के दो-दो अध्यक्ष और चार-चार महामंत्री सामने आ चुके हैं। यह अभूतपूर्व (Political Internal Conflict) पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचा रहा है। एक तरफ जिलाध्यक्ष की अधिकृत सूची है, तो दूसरी तरफ मंडल अध्यक्षों द्वारा जारी की गई ‘जमीनी’ सूची।

फिलहाल, जिले के बड़े नेता इस मामले पर मौन साधे हुए हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष पुरषोत्तम देवांगन की तबीयत बिगड़ने की खबर है, वहीं भाजयुमो जिलाध्यक्ष का फोन बंद आ रहा है। अब सबकी नजरें प्रदेश नेतृत्व पर टिकी हैं कि वे इस समांतर संगठन की चुनौती और गुटबाजी को कैसे शांत करते हैं।


