सीजी भास्कर, 20 अप्रैल : भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने आम चुनाव और उपचुनाव 2026 के मद्देनजर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लगाम कसने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की भ्रामक, अवैध या एआई-जनित (AI-generated) सामग्री पाए जाने पर, प्लेटफॉर्म्स को संज्ञान में आने के मात्र 3 घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी। यह कदम निष्पक्ष चुनाव और मतदाताओं के भरोसे को बनाए रखने के लिए ECI Action on Social Media के तहत उठाया गया है।
AI कंटेंट के लिए ‘डिस्क्लोजर’ अनिवार्य
आयोग ने राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए नए नियम लागू किए हैं। अब चुनाव प्रचार में उपयोग की जाने वाली किसी भी एआई-परिवर्तित या सिंथेटिक सामग्री पर स्पष्ट रूप से “एआई-जनित” या “डिजिटल रूप से संवर्धित” का लेबल लगाना अनिवार्य होगा। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सामग्री बनाने वाली मूल इकाई का खुलासा भी करना होगा। ECI Action on Social Media का उद्देश्य एआई के जरिए फैलाई जाने वाली फर्जी खबरों और ‘डीपफेक’ पर लगाम लगाना है।
11 हजार से अधिक पोस्ट पर गाज
असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में चल रहे विधानसभा चुनावों के दौरान चुनाव आयोग की पैनी नजर सोशल मीडिया पर है। 15 मार्च 2026 को चुनाव घोषणा के बाद से अब तक 11,000 से अधिक अवैध पोस्ट/URL की पहचान कर उन पर कार्रवाई की गई है। इनमें आदर्श आचार संहिता (MCC) का उल्लंघन करने वाली पोस्ट, एफआईआर और कंटेंट हटाना शामिल है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के तहत मतदान से 48 घंटे पहले की मौन अवधि के दौरान सोशल मीडिया पर चुनावी प्रचार पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
‘सी-विजिल’ ऐप बना मतदाताओं का हथियार
आचार संहिता के उल्लंघन की रिपोर्ट करने के लिए ईसीआई का ‘सी-विजिल’ (cVIGIL) मॉड्यूल अत्यंत प्रभावी साबित हो रहा है। 15 मार्च से 19 अप्रैल के बीच कुल 3,23,099 शिकायतें दर्ज की गई हैं। आयोग की मुस्तैदी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इनमें से 96.01% (3,10,393 शिकायतें) का समाधान निर्धारित 100 मिनट के भीतर कर दिया गया। यह ECI Action on Social Media और चुनावी मशीनरी की सक्रियता का बड़ा उदाहरण है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को सीधी चेतावनी
आयोग ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और आईटी नियम, 2021 का हवाला देते हुए सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को जिम्मेदार और नैतिक उपयोग सुनिश्चित करने को कहा है। मतदान प्रक्रिया या ईवीएम के खिलाफ झूठी कहानियों की निगरानी सीधे राज्य आईटी नोडल अधिकारियों द्वारा की जा रही है। किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाली सामग्री पर तत्काल एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।


