सीजी भास्कर, 27 अप्रैल I महिला आरक्षण को लेकर देश और प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। एक ओर भाजपा महिला आरक्षण बिल को लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर अड़ंगा डालने का आरोप लगाते हुए इसे बड़ा मुद्दा बना रही है और व्यापक अभियान चला रही है। वहीं कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर इस मुद्दे को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है। (Politics intensifies over women’s reservation)
भाजपा विशेष सत्र बुलाकर निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी में : Politics intensifies over women’s reservation
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा महिला आरक्षण के नाम पर असली मुद्दों से ध्यान भटका रही है और परिसीमन से जुड़े संशोधन को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। दूसरी तरफ भाजपा इस मुद्दे को लेकर सक्रिय हो गई है और विधानसभा के साथ-साथ नगरीय निकायों में विशेष सत्र बुलाकर निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी में है।
रविवार को कांग्रेस भवन में मीडिया से चर्चा के दौरान पूर्व महापौर हेमा देशमुख और शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा सहित अन्य नेताओं ने कहा कि वर्ष 2023 में पारित 106वां संविधान संशोधन (महिला आरक्षण कानून) लागू नहीं किया जा रहा, जो महिलाओं के साथ अन्याय है।
कांग्रेस ने इसे “महिला आरक्षण का मुखौटा” बताया
कांग्रेस ने 16 अप्रैल को पेश किए गए 131वें संविधान संशोधन बिल पर भी सवाल उठाते हुए इसे “महिला आरक्षण का मुखौटा” बताया। नेताओं का कहना है कि यह बिल वास्तव में परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े बदलावों के लिए लाया गया है।
कांग्रेस का दावा है कि महिला आरक्षण बिना परिसीमन के भी वर्तमान सीटों में 33% आरक्षण देकर लागू किया जा सकता है और सभी विपक्षी दल इसके लिए तैयार हैं, लेकिन सरकार जानबूझकर देरी कर रही है।
बिलासपुर समेत प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में भी सामान्य सभा : Politics intensifies over women’s reservation
वहीं भाजपा 30 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित कर इस मुद्दे पर चर्चा करेगी। इसके साथ ही बिलासपुर समेत प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में भी सामान्य सभा बुलाई जाएगी, जिसमें महिला आरक्षण को लेकर विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करने की तैयारी है।


