छत्तीसगढ़ में मानसून के दोबारा सक्रिय होने के बाद बिलासपुर और जांजगीर-चांपा जिलों में भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से नदी-नाले उफान पर हैं और कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। जलभराव और तेज बहाव के कारण कई स्थानों पर लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान चलाना पड़ा।
बिलासपुर शहर के श्रीकांत वर्मा मार्ग, हंसा विहार, मित्र विहार, सरकंडा के बंधवापारा, जोरापारा और शिवम होम्स सहित कई कॉलोनियों में घरों और सड़कों पर पानी भर गया। हालात को देखते हुए जिले के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। वहीं रेलवे ट्रैक पर पानी भरने के कारण पांच मेमू ट्रेनों को रद्द कर दिया गया, जबकि तीन ट्रेनों के मार्ग में बदलाव किया गया है।
बिलासपुर-मस्तूरी राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई स्थानों पर चार से पांच फीट तक पानी बहने से यातायात पूरी तरह बंद हो गया। कोटमीसोनार के पास लीलागर नदी का जलस्तर बढ़ने से पुल के ऊपर से पानी बहने लगा, जिसके चलते प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से वाहनों की आवाजाही रोक दी। दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा।
अकलतरा-बिलासपुर फोरलेन भी जलमग्न हो गया। तेज बहाव और सड़क के ऊपर पानी आने से सड़क की पहचान तक मुश्किल हो गई, जिससे दुर्घटना की आशंका को देखते हुए यातायात बंद कर दिया गया।
मौसम विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटे में बिलासपुर जिले में औसतन 74.7 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सीपत क्षेत्र में सबसे अधिक 110.2 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।
लगातार बारिश के बीच स्वास्थ्य विभाग ने सर्पदंश की घटनाओं की आशंका को देखते हुए सभी जिला अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में पॉलीवैलेंट एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध कराया है। विभाग के अनुसार प्रदेश में एक लाख से अधिक वायल का स्टॉक मौजूद है, जिसे आवश्यकता के अनुसार विभिन्न जिलों में उपलब्ध कराया जा रहा है।



