सीजी भास्कर, 1 जुलाई। रायपुर नगर निगम ने वित्तीय पारदर्शिता, जवाबदेही और खर्च पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए बड़ा प्रशासनिक (Raipur Municipal Corporation ) फैसला लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब जोन आयुक्त अपने स्तर पर केवल 50 हजार रुपये तक के भुगतान को ही मंजूरी दे सकेंगे। इससे अधिक राशि के सभी भुगतान अब नगर निगम मुख्यालय से स्वीकृत होंगे। पहले जोन कार्यालयों को 4 लाख रुपये तक भुगतान की स्वीकृति देने का अधिकार प्राप्त था।
ऑडिट आपत्तियां कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर
नगर निगम प्रशासन के अनुसार यह निर्णय ऑडिट आपत्तियों को कम करने, भुगतान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने और वित्तीय अनुशासन को सख्ती से लागू करने के उद्देश्य से लिया गया है। जोन स्तर पर भुगतान से जुड़ी लगातार मिल रही शिकायतों और अनियमितताओं को देखते हुए वित्तीय अधिकारों में यह बदलाव किया गया है।
भुगतान से जुड़ी कई फाइलें ऑडिट में लंबित
नगर निगम में सफाई कार्यों के ठेके और प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों के भुगतान संबंधी कई फाइलें लंबे समय से ऑडिट प्रक्रिया में अटकी हुई हैं। हाल ही में विभिन्न जोनों से करीब 60 फाइलें जांच के लिए मुख्यालय भेजी गई थीं, जिनमें से केवल 7 फाइलों को ही स्वीकृति मिल सकी। इसके चलते कई ठेकेदारों और एजेंसियों के भुगतान में देरी बनी हुई है।
ठेकेदार संघ ने उठाए सवाल, भुगतान में देरी पर जताई नाराजगी
नगर निगम सिविल ठेकेदार संघ ने भी ऑडिट प्रक्रिया की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। संघ का आरोप है कि ऑडिटर कई-कई दिनों तक फाइलों की जांच नहीं कर रहे हैं, जिससे ठेकेदारों को समय पर भुगतान नहीं मिल पा रहा और विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
ऑडिट प्रक्रिया होगी तेज, बढ़ाई जाएगी ऑडिटरों की संख्या
नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने बताया कि वित्तीय अधिकारों में बदलाव का निर्णय पहले ही लिया जा चुका था और इसे पारदर्शिता तथा बेहतर वित्तीय प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि लंबित मामलों के शीघ्र निराकरण के लिए ऑडिटरों की संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, ताकि भुगतान संबंधी फाइलों का समयबद्ध निपटारा हो सके।



