सीजी भास्कर, 9 सितम्बर |
34 साल पुराने क्वार्टर में रह रहे पुलिस परिवार, खतरे के साए में ज़िंदगी
राजधानी रायपुर में पुलिसकर्मियों के लिए बने आवास (Raipur Police Quarters Danger) अब जर्जर हालात में पहुंच चुके हैं। आमानाका क्षेत्र के ये क्वार्टर करीब 34 साल पुराने हैं।
हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि छत और सीढ़ियां बल्लियों के सहारे खड़ी हैं। यहां करीब 20 पुलिस परिवार रह रहे हैं, जिनकी जान पर हर वक्त खतरा मंडरा रहा है।नगर निगम ने घोषित किए खतरनाक, फिर भी जारी है रहन-सहन
इन 24 मकानों को नगर निगम पहले ही खतरनाक घोषित कर चुका है। इसके बावजूद न तो इन्हें खाली कराया गया और न ही ध्वस्त किया गया।
पुलिस परिवारों का कहना है कि मजबूरी में इन टूटे-फूटे मकानों में रहना पड़ रहा है। (Raipur Police Quarters Danger) जैसी स्थिति में किसी भी समय बड़ी दुर्घटना हो सकती है।हाईकोर्ट की सख्ती, कहा- सुरक्षा के लिए तुरंत उठे कदम
इस मामले को लेकर प्रकाशित जानकारी पर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने संज्ञान लिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु ने पुलिस परिवारों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।
कोर्ट ने पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन के एमडी को 17 सितंबर तक शपथपत्र के साथ जवाब देने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट का कहना है कि (Raipur Police Quarters Danger) के बीच परिवारों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।नई आवास योजना छह साल से अटकी, मरम्मत भी अधूरी
कॉन्स्टेबल और हेड कॉन्स्टेबल स्तर के पुलिसकर्मी इन जर्जर मकानों में रह रहे हैं। जानकारी सामने आई कि मरम्मत के लिए 10 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए थे और 400 करोड़ रुपए की नई आवास योजना बनाई गई थी। लेकिन, बीते छह सालों से न तो नए मकान बने और न ही मरम्मत पूरी हुई। यही वजह है कि (Raipur Police Quarters Danger) लगातार गहराता जा रहा है।
परिवारों की अपील- तुरंत मिले सुरक्षित घर
इन क्वार्टरों में रहने वाले परिवारों का कहना है कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी अब दहशत में बदल चुकी है। छत के गिरने और सीढ़ियों के टूटने का डर हर वक्त बना रहता है। उनका मानना है कि जब तक नए मकान नहीं दिए जाते, तब तक बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा खतरे में रहेगी।





