इलाज के दौरान आठ दिन तक ज़िंदगी से जूझती रही युवती की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। परिजनों का कहना है कि घटना के बाद से कार्रवाई की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं रही, जिससे (Sakti Burning Case) में न्याय को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मां का दावा—होटल में बुलाकर हमला
परिवार के अनुसार, युवती ने अस्पताल पहुंचते समय खुद बताया था कि उसे बातचीत के बहाने बुलाया गया, फिर विवाद के बाद उस पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा दी गई। (Victim Statement Before Death) को परिजन मामले की अहम कड़ी मान रहे हैं और इसे जांच में निर्णायक साक्ष्य के रूप में शामिल करने की मांग कर रहे हैं।
गिरफ्तारी में देरी पर उठे सवाल
मां का आरोप है कि शुरुआती सूचना के बावजूद आरोपियों पर त्वरित कार्रवाई नहीं हुई। (Delayed Police Action) को लेकर परिवार ने निष्पक्ष जांच और शीघ्र गिरफ्तारी की मांग दोहराई है, ताकि साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका खत्म हो।
स्थानीय से आईसीयू तक का सफ़र
घटना के बाद युवती को पहले नज़दीकी अस्पताल ले जाया गया, हालत बिगड़ने पर उन्नत इलाज के लिए रेफर किया गया और आईसीयू में रखा गया। (Hospital Referral Timeline) के दौरान डॉक्टरों की टीम ने लगातार प्रयास किए, मगर गंभीर जलन के चलते जान नहीं बच सकी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की बात
जांच एजेंसियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और केस डायरी के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तेज की जाएगी। (Legal Process Update) के तहत परिजन चाहते हैं कि सभी नामजद लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो और जल्द ठोस कदम उठें।




