सीजी भास्कर, 28 अप्रैल। संयुक्त राष्ट्र के तहत चल रही परमाणु अप्रसार संधि (NPT) की एक महीने लंबी बैठक की शुरुआत हो गई है। इस दौरान 34 देशों के प्रतिनिधियों को उपाध्यक्ष चुना गया, जिनमें ईरान का नाम भी शामिल है। (Setback for America at the UN)
अमेरिका के कड़े विरोध के बावजूद 121 देशों के समर्थन से ईरान को एनपीटी में उपाध्यक्ष का पद मिल गया। एनपीटी में हर 5 साल में एक अध्यक्ष और 34 उपाध्यक्ष चुने जाते हैं। इस बार अध्यक्ष पद वियतनाम को मिला है, जिसे चीन और रूस का करीबी माना जाता है।
अमेरिका ने इस फैसले को रोकने की पूरी कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे एनपीटी के लिए “अपमानजनक” करार दिया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) में ईरान के दूत रजा नजाफी ने अमेरिका पर पलटवार करते हुए उसकी नीतियों पर सवाल उठाए।
बैठक में गुटनिरपेक्ष देशों ने ईरान का समर्थन किया, जबकि संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका जैसे देशों का विरोध असरदार नहीं रहा।
NPT क्या है? : Setback for America at the UN
परमाणु अप्रसार संधि (NPT) 1970 में शीत युद्ध के दौरान शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य दुनिया को परमाणु हथियारों के खतरे से बचाना है। इसमें 190 से अधिक देश सदस्य हैं। इसके तीन मुख्य लक्ष्य हैं:
- परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना I
- मौजूदा हथियारों में कमी लाना I
- परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना I


