सीजी भास्कर, 12 जुलाई। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले का प्रसिद्ध सिद्धखोल जलप्रपात (Siddhkhol Eco Tourism) इन दिनों पर्यटकों की पहली पसंद बना हुआ है। वन विभाग के मार्गदर्शन में संयुक्त वन प्रबंधन समिति कुकरीकोना द्वारा संचालित ईको-टूरिज्म मॉडल न केवल पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बन रहा है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी परिवारों के लिए रोजगार का मजबूत माध्यम भी साबित हो रहा है। पर्यटन गतिविधियों से गांव के युवाओं और महिला स्व-सहायता समूहों को सीधे आर्थिक लाभ मिल रहा है।
स्थानीय युवाओं को मिला रोजगार, पर्यटकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी
ईको-टूरिज्म प्रबंधन (Siddhkhol Eco Tourism) के तहत समिति ने स्थानीय युवाओं का पर्यटन समूह बनाया है। ये प्रशिक्षित युवा जलप्रपात आने वाले पर्यटकों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। मानसून के दौरान संवेदनशील और खतरनाक स्थानों पर तैनात रहकर पर्यटकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा रही है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्राथमिक उपचार (First Aid) की व्यवस्था भी की गई है।

प्लास्टिक मुक्त पर्यटन की अनूठी पहल : Siddhkhol Eco Tourism
सिद्धखोल (Siddhkhol Eco Tourism) क्षेत्र को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए समिति ने नई व्यवस्था लागू की है। पर्यटकों से पानी की प्लास्टिक बोतल पर 50 रुपये रिफंडेबल सुरक्षा राशि ली जाएगी, जो बोतल वापस करने पर लौटा दी जाएगी। परिसर में बांस के कूड़ेदान लगाए जाएंगे, जबकि महिला स्व-सहायता समूह पर्यटकों को जूट और कपड़े के थैले तथा दोना-पत्तल उपलब्ध कराएंगे। प्रत्येक सोमवार को वन विभाग और समिति संयुक्त रूप से स्वच्छता अभियान भी चलाएंगे।
प्रवेश शुल्क व्यवस्था में बड़ा बदलाव : Siddhkhol Eco Tourism
पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पार्किंग शुल्क की पुरानी व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। पहले दोपहिया वाहनों से 20 रुपये और चार पहिया वाहनों से 30 रुपये पार्किंग शुल्क लिया जाता था। अब इसकी जगह सिर्फ 10 रुपये प्रति व्यक्ति प्रवेश शुल्क निर्धारित किया गया है, जिससे पर्यटकों को सरल और पारदर्शी व्यवस्था का लाभ मिलेगा।
ग्रामीणों की आय बढ़ी, वनों से जुड़ाव हुआ मजबूत
ईको-टूरिज्म मॉडल से कुकरीकोना गांव के दर्जनों परिवारों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। पर्यटन से समिति की आय बढ़ी है और ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे वनों के संरक्षण के प्रति उनकी जिम्मेदारी और जुड़ाव भी पहले से अधिक बढ़ा है।


