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Home » SIR Voter List Dispute पर बंगाल में टकराव गहराया—’खून में सने हाथ’ से शुरू हुई तीखी बहस, EC-TMC आमने-सामने

SIR Voter List Dispute पर बंगाल में टकराव गहराया—’खून में सने हाथ’ से शुरू हुई तीखी बहस, EC-TMC आमने-सामने

By Newsdesk Admin
29/11/2025
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सीजी भास्कर, 29 नवंबर | पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर जारी तनाव मंगलवार को उस समय और तेज हो गया, जब समीक्षा बैठक में सत्ताधारी दल के प्रतिनिधि और चुनाव प्रबंधन प्रणाली के अधिकारी एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाते दिखे। शुरुआत से ही माहौल इतना गरम था कि प्रतिनिधिमंडल ने SIR Voter List Dispute को “मौतों से जुड़ा अभियान” तक कहा।
बैठक में मौजूद नेताओं ने दावा किया कि SIR की प्रक्रिया के चलते अब तक 40 लोगों की मौत हो चुकी है, और जमीनी स्तर पर काम कर रहे BLO लगातार दबाव में हैं।

Contents
  • ‘आपके हाथ खून से सने हैं’—तीखा आरोप
  • EC की कड़ी सफाई—‘बंगाल को निशाना नहीं बनाया’
  • पूरी मीटिंग की रिकॉर्डिंग जारी करने की मांग
  • विवाद बढ़ने की असली वजह क्या?
  • EC ने कहा—9 दिसंबर के बाद खुले दरवाजे
  • बंगाल की राजनीति में नई गर्मी

‘आपके हाथ खून से सने हैं’—तीखा आरोप

बैठक के दौरान एक वरिष्ठ नेता ने मुख्य अधिकारी की तरफ मुड़कर कहा कि “आपके हाथ खून से सने हैं,” जिससे कमरे में कुछ समय के लिए असहज खामोशी छा गई। प्रतिनिधियों का कहना था कि कई परिवार लगातार शिकायत कर रहे हैं कि वोटर सत्यापन प्रक्रिया जरूरत से ज्यादा कठोर बन गई है।
उनके मुताबिक, यह स्थिति सिर्फ प्रशासनिक दबाव की नहीं बल्कि SIR Deadly Pressure जैसी परिस्थिति बन गई है।

EC की कड़ी सफाई—‘बंगाल को निशाना नहीं बनाया’

अधिकारी पक्ष ने इस आरोप को सिरे से खारिज किया। उनका कहना था कि SIR एक मानक प्रक्रिया है, जो देश के कई राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों में समान रूप से चल रही है।
अधिकारियों ने दोहराया कि SIR को लेकर फैलाई जा रही बातें misleading claims हैं, और किसी भी राजनीतिक समूह को BLO या क्षेत्रीय कर्मचारियों पर दबाव बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही यह भी कहा गया कि जमीन पर भय का माहौल बनाना गलत है।

पूरी मीटिंग की रिकॉर्डिंग जारी करने की मांग

तनाव तब और बढ़ गया जब प्रतिनिधियों ने कहा कि आधी-अधूरी जानकारियाँ लीक की जा रही हैं और पूरी बातचीत सामने लाई जानी चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि बैठक की CCTV फुटेज और रिकॉर्डेड डॉक्यूमेंट सबके लिए उपलब्ध कराए जाएं।
नेताओं ने सवाल उठाया कि यदि प्रक्रिया सचमुच पारदर्शी है, तो SIR Transparency Test से बचना क्यों?

विवाद बढ़ने की असली वजह क्या?

तनाव की जड़ में वह सवाल है, जिसे लेकर दोनों पक्षों की राय बिल्कुल अलग है—अगर लक्ष्य संदिग्ध वोटरों की पहचान करना है, तो केवल चुनिंदा राज्यों में ही इतना कठोर अभियान क्यों चलाया जा रहा है?
प्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक चेहरे दावा कर रहे हैं कि लाखों नाम हटाए जाएंगे, जबकि उसकी आधिकारिक पुष्टि किसी स्तर पर नहीं की गई। इससे लोगों में भ्रम और चिंता दोनों बढ़ी हैं।

EC ने कहा—9 दिसंबर के बाद खुले दरवाजे

अधिकारियों ने साफ किया कि मसौदा वोटर सूची 9 दिसंबर के बाद सार्वजनिक होगी और उसके बाद सभी दल सुझाव व आपत्तियाँ दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया अभी जारी है और इसे प्रभावित करने वाली कोई भी कोशिश प्रशासनिक काम में बाधा मानी जाएगी।
इधर, प्रतिनिधिमंडल का दावा है कि जनता में भय का माहौल बढ़ रहा है और अधिकारी इसे संभाल नहीं पा रहे।

बंगाल की राजनीति में नई गर्मी

दूसरी ओर, दस सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल—जिसमें कई प्रमुख नेता शामिल थे—ने मीटिंग से बाहर निकलते समय कहा कि स्थिति गंभीर है और इससे राज्यभर में तनाव फैला है।
इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति को नई दिशा दे दी है—एक ओर अधिकारी अपनी निष्पक्षता को दोहरा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रतिनिधि इस अभियान को “जीवन लेने वाली प्रक्रिया” बताकर आक्रामक तेवर दिखा रहे हैं।

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