सीजी भास्कर, 24 मई : छत्तीसगढ़ में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Special Teacher Recruitment Crisis) ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने साफ कहा है कि प्रदेश में स्वीकृत विशेष शिक्षकों के सभी रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया तेज गति से पूरी की जाए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि शेष पदों पर भर्ती की कार्रवाई अगले दो महीने के भीतर पूरी कर ली जाए और जुलाई 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट पेश की जाए।
दरअसल, प्रदेश में विशेष आवश्यकता वाले करीब 49 हजार बच्चों की पढ़ाई फिलहाल शिक्षकों की भारी कमी से प्रभावित हो रही है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में बताया गया कि इन बच्चों के लिए लगभग 3981 विशेष शिक्षकों की जरूरत है, जबकि राज्य में सिर्फ 848 पद ही स्वीकृत हैं। इनमें भी लंबे समय तक भर्ती प्रक्रिया अटकी रही।
सिर्फ 100 पदों पर भर्ती शुरू होने पर कोर्ट नाराज
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर नाराजगी जताई कि 848 स्वीकृत पदों (Special Teacher Recruitment Crisis) के बावजूद राज्य सरकार ने केवल 100 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की। अदालत ने कहा कि विशेष बच्चों की शिक्षा से जुड़ा मामला बेहद संवेदनशील है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि विशेष स्कूलों में संविदा पर कार्यरत शिक्षकों को भी नियमानुसार अवसर दिया जाए। वर्तमान में कार्यरत 155 ब्लॉक रिसोर्स पर्सन और 85 निश्चित मानदेय वाले विशेष शिक्षकों को स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष प्रस्तुत होने का मौका देने को कहा गया है।
योग्य संविदा शिक्षकों को मिल सकता है मौका
अदालत ने कहा कि यदि संविदा शिक्षक भारतीय पुनर्वास परिषद द्वारा तय शैक्षणिक और व्यावसायिक योग्यताओं को पूरा करते हैं, तो उनकी नियुक्ति पर नियमानुसार विचार किया जाए। कोर्ट ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
RCI Teacher Association की याचिका पर सुनवाई
यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ आरसीआई टीचर एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। मामले में राजनीश कुमार पांडेय एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य प्रकरण पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता कौस्तुभ शुक्ला और पलाश तिवारी ने पक्ष रखा।
याचिका में यह भी बताया गया कि अदालत के पूर्व हस्तक्षेप के बाद ही 100 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। इनमें 62 शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी है, जबकि 38 पद अब भी शिक्षक पात्रता परीक्षा से जुड़े कारणों से खाली पड़े हैं।
बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर असर
विशेष शिक्षकों (Special Teacher Recruitment Crisis) की कमी का सीधा असर दिव्यांग और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में स्थिति और गंभीर बताई जा रही है, जहां कई स्कूलों में वर्षों से विशेष शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद राज्य सरकार पर जल्द भर्ती पूरी करने का दबाव बढ़ गया है।



