सीजी भास्कर, 2 अप्रैल। कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले से एक बेहद दुखद घटना सामने (Student Suicide Case) आई है, जहां सहपाठियों द्वारा फैलाए गए आरोपों और मानसिक प्रताड़ना से आहत एक छात्रा ने अपनी जान दे दी। यह मामला शिक्षा संस्थानों में बढ़ती मानसिक दबाव और अफवाहों के खतरनाक असर को उजागर करता है।
सहपाठियों की बातों से आहत होकर उठाया कदम (Student Suicide Case)
जानकारी के अनुसार, 22 वर्षीय छात्रा लिखिता आयुर्वेद की पढ़ाई कर रही थी। वह BAMS कोर्स की छात्रा थी और पढ़ाई में सामान्य रूप से आगे बढ़ रही थी।
लेकिन उसके कुछ सहपाठियों ने उसका नाम कॉलेज के एक लेक्चरर के साथ जोड़ना शुरू कर दिया। लगातार फैल रही इन बातों और तानों से वह मानसिक रूप से काफी परेशान हो गई थी। बताया जा रहा है कि उसने इस अपमान को सहन नहीं कर पाई और आखिरकार आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठा लिया।
सुसाइड नोट में बयां किया दर्द
छात्रा ने अपने पीछे एक सुसाइड नोट (Student Suicide Case) भी छोड़ा, जिसमें उसने साफ तौर पर लिखा कि वह अपने सहपाठियों की बातों और बदनामी से परेशान थी। नोट में उसने उन लोगों के नाम भी लिखे, जिनकी वजह से वह मानसिक रूप से टूट गई थी। यह साफ संकेत है कि वह लंबे समय से इस दबाव को झेल रही थी।
परिवार ने समझाया, लेकिन नहीं रुकी त्रासदी
छात्रा के माता-पिता दोनों शिक्षक हैं और उन्होंने बेटी को समझाने की कोशिश भी की थी। परिजनों ने उसे पढ़ाई पर ध्यान देने और ऐसी बातों को नजरअंदाज करने की सलाह दी थी, लेकिन लगातार हो रही मानसिक पीड़ा ने उसे अंदर से कमजोर कर दिया।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
इस घटना के बाद Holalkere थाना पुलिस ने मामला दर्ज (Student Suicide Case) कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि छात्रा को किस स्तर तक मानसिक प्रताड़ना दी गई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
बड़ा सवाल: कब रुकेगा मानसिक उत्पीड़न?
यह घटना एक गंभीर सवाल खड़ा करती है क्या सिर्फ शारीरिक हिंसा ही अपराध है, या मानसिक उत्पीड़न भी उतना ही खतरनाक है? कॉलेज और स्कूलों में फैलती अफवाहें, मजाक और बदनामी कई बार किसी की जिंदगी पर भारी पड़ सकती हैं। इस मामले ने एक बार फिर दिखा दिया कि मानसिक स्वास्थ्य और संवेदनशील व्यवहार कितना जरूरी है।


