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Supreme Court Biometric Attendance Verdict : बायोमीट्रिक हाजिरी प्रणाली अवैध नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा ‘यह हितधारकों के लाभ के लिए है

By Newsdesk Admin
05/11/2025
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Supreme Court Biometric Attendance Verdict
Supreme Court Biometric Attendance Verdict

सीजी भास्कर, 5 नवंबर। सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि बायोमीट्रिक उपस्थिति प्रणाली (Supreme Court Biometric Attendance Verdict) को केवल इसलिए अवैध नहीं कहा जा सकता क्योंकि इसे लागू करने से पहले सरकारी कर्मचारियों से परामर्श नहीं किया गया था। न्यायालय ने कहा कि यह प्रणाली “सभी हितधारकों के हित में (in the interest of all stakeholders)” है और सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता व अनुशासन सुनिश्चित करने का एक आधुनिक कदम है।

Contents
  • परामर्श का अभाव प्रणाली को अवैध नहीं बनाता
  • क्या है बायोमीट्रिक उपस्थिति प्रणाली (BAS)
  • फैसले के बाद प्रशासनिक सुधार को मिला समर्थन

यह फैसला ओडिशा के प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) कार्यालय में लागू बायोमीट्रिक प्रणाली को लेकर दी गई चुनौती पर आया है। शीर्ष अदालत ने सरकार के उस फैसले को सही ठहराया जिसके तहत कार्यालय में एक जुलाई 2013 से बीएएस लागू किया गया था।

परामर्श का अभाव प्रणाली को अवैध नहीं बनाता

न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने केंद्र सरकार की उस याचिका को स्वीकार किया, जिसमें उड़ीसा उच्च न्यायालय के 21 अगस्त 2014 के फैसले को चुनौती दी गई थी। उच्च न्यायालय ने कहा था कि बीएएस संबंधी परिपत्र कर्मचारियों से पूर्व परामर्श किए बिना जारी किए गए थे, इसलिए यह प्रक्रिया नियमों के अनुरूप नहीं थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने 29 अक्टूबर के आदेश (29 October order) में कहा कि जब बायोमीट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करना सभी हितधारकों के हित में है, तो केवल इस आधार पर कि कर्मचारियों से पहले परामर्श नहीं लिया गया, इसे अवैध नहीं ठहराया जा सकता।

क्या है बायोमीट्रिक उपस्थिति प्रणाली (BAS)

बायोमीट्रिक उपस्थिति प्रणाली (BAS) एक ऐसी तकनीक है जिसमें कर्मचारी की उंगलियों या चेहरे की पहचान (fingerprint or facial recognition) के माध्यम से हाजिरी दर्ज की जाती है। इससे ऑफिस अनुशासन (office discipline) में सुधार होता है और फर्जी उपस्थिति या देरी पर नियंत्रण पाया जा सकता है। केंद्र सरकार ने 2013 के बाद से इसे देशभर के मंत्रालयों, सार्वजनिक उपक्रमों और विभागों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया है।

फैसले के बाद प्रशासनिक सुधार को मिला समर्थन

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को सरकारी पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए एक महत्वपूर्ण न्यायिक समर्थन (judicial endorsement) माना जा रहा है। प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले से डिजिटल गवर्नेंस को और मजबूती मिलेगी। अब राज्य और केंद्र के कई अन्य विभागों में भी बायोमीट्रिक सिस्टम को तेजी से लागू करने का रास्ता साफ हो गया है।

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