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Home » वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने वापस लिया अंतरिम आदेश, कल फिर होगी सुनवाई

वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने वापस लिया अंतरिम आदेश, कल फिर होगी सुनवाई

By Newsdesk Admin
16/04/2025
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सीजी भास्कर 16 अप्रैल वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ दायर 73 याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई. सभी पक्षों को सुनने के बाद चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के वी विश्वनाथन की तीन सदस्यीय पीठ ने अंतरिम आदेश वापस ले लिया है. कोर्ट ने वक्फ कानून पर रोक नहीं लगाई है. पहले अंतरिम आदेश में कोर्ट ने कहा था कि जो भी संपत्ति वक्फ घोषित की गई है, जो भी संपत्ति उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ घोषित की गई है, या न्यायालय द्वारा घोषित की गई है, उसे गैर-अधिसूचित नहीं किया जाएगा. कलेक्टर कार्यवाही जारी रख सकते हैं लेकिन प्रावधान लागू नहीं होगा.

पदेन सदस्य नियुक्त किए जा सकते हैं. उन्हें धर्म की परवाह किए बिना नियुक्त किया जा सकता है लेकिन अन्य मुस्लिम होने चाहिए. कोर्ट ने वक्फ कानून को लेकर कोलकाता में हो रही हिंसा पर चिंता भी जताई. इस मामले में अब गुरुवार दोपहर 2 बजे सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगीसीजेआई ने कहा कि हम सभी को नहीं सुन सकते. इसलिए तय कर देंगे कि कौन बहस करेगा. हम एक एक कर नाम लेंगे. कोई भी दलील नहीं दोहराएगा. तमाम रिट याचिकाएं हैं और सभी ब्रीफ नोट तैयार करेंगे. दूसरा किन आधारों पर तर्क रखेंगे.वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि मैं वरिष्ठ हूं, मुझे मौका दिया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी डेकोरम बनाएं रखें. सीजेआई ने कहा दो सवाल हैं- क्या मामला हाईकोर्ट भेजें, आपके तर्कों के आधार क्या हैं. कपिल सिब्बल ने कहा कि यह कानून अनुच्छेद 26 का उल्लंघन करता है.सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि यह अनुच्छेद मूवेबल और इमूवेबल संपत्ति जो धर्म संबंद्धी है उनको संरक्षित करता है.सिब्बल ने कहा कि मैं मोटे तौर पर बता दूं कि चुनौती किस बारे में है. संसदीय कानून के माध्यम से जो करने की कोशिश की जा रही है, वह एक धर्म के आवश्यक और अभिन्न अंग में हस्तक्षेप करना है.

मैं अनुच्छेद 26 का उल्लेख करता हूं और अधिनियम के कई प्रावधान अनुच्छेद 26 का उल्लंघन करते हैं.सिब्बल ने कहा कि वक्फ के मामले में पर्सनल लॉ लागू होता है और मैं ऐसे में किसी अन्य का अनुसरण क्यों करूंगा. सिब्बल ने कहा कि 2025 अधिनियम की धारा 3(आर) का संदर्भ देते हुए- वक्फ की परिभाषा देखिए.सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनौती बिंदुवार बताई जानी चाहिए. सिब्बल ने कहा कि मैं धारा 3(आर) को चुनौती दे रहा हूं. आखिर मैं राज्य के अधीन क्यों रहूंगा, जबकि पर्सनल लॉ इस्लाम का है.सिब्बल ने कहा कि धारा 3(ए)(2)- वक्फ-अल-औलाद के गठन से महिलाओं को विरासत से वंचित नहीं किया जा सकता. इस बारे में कहने वाला राज्य कौन होता है? सीजेआई ने कहा कि हिंदू में भी सरकार ने कानून बनाया है. संसद ने मुसलमानों के लिए भी कानून बनाया है.सीजेआई ने कहा कि अनुच्छेद 26 धर्मनिरपेक्ष है, सभी समुदायों पर लागू होता है. सिब्बल ने कहा कि इस्लाम में उत्तराधिकार मृत्यु के बाद मिलता है, वे उससे पहले ही हस्तक्षेप कर रहे हैं. इसके बाद धारा 3(सी) के तहत वक्फ के रूप में पहचानी गई या घोषित की गई सरकारी संपत्ति को अधिनियम के लागू होने के बाद वक्फ नहीं माना जाएगा.कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार और वक्फ के बीच विवाद में सरकारी अधिकारी निर्णय लेगा.

यह सही नहीं है. सिब्बल ने कहा कि कानून की धारा 3(सी)(2)- वे घोषणा कर सकते हैं कि यह उनकी संपत्ति है. इस प्रक्रिया में कोई समय सीमा नहीं है.कपिल सिब्बल ने दिल्ली की जामा मस्जिद का जिक्र किया. सीजेआई ने कहा कि वक्फ के बाद ASI के तहत कई ऐतिहासिक इमारतें दी गई हैं जो Ancient monument act के तहत हैं. सिब्बल ने कहा कि आपने एक ऐसे अधिकारी की पहचान की है जो सरकार का अधिकारी है. यह अपने आप में असंवैधानिक है. सीजेआई ने कहा कि ऐसे कितने मामले होंगे? मेरी समझ से, व्याख्या आपके पक्ष में है. अगर इसे प्राचीन स्मारक घोषित किए जाने से पहले वक्फ घोषित किया गया है, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा. यह वक्फ ही रहेगा, आपको तब तक आपत्ति नहीं करनी चाहिए जब तक कि इसे संरक्षित घोषित किए जाने के बाद वक्फ घोषित नहीं किया जा सकता.सीजेआई ने कहा कि जामा मस्जिद समेत सभी प्राचीन स्मारक संरक्षित रहेंगे. सिब्बल ने कहा कि पांचवां प्वाइंट कानून की धारा एस.3ई- अब, मेरे पास एक चार्ट है, जिसमें सभी मुसलमानों को अनुसूचित जनजाति माना गया है.

सीजेआई ने कहा कि क्या ऐसा कोई कानून नहीं है जो कहता है कि अनुसूचित जनजातियों की संपत्ति को मंजूरी के बिना हस्तांतरित नहीं किया जा सकता है?- सिब्बल ने कहा कि सेंट्रल वक्फ काउंसिल, 1995 के तहत, सभी नामांकित व्यक्ति मुस्लिम थे. मेरे पास चार्ट है, सभी हिंदू या सिख बंदोबस्त, नामांकित व्यक्ति हिंदू या सिख हैं- यह सीधा उल्लंघन है. यह 200 मिलियन को संसदीय तरीके से हड़पना है.सिब्बल ने राम जन्मभूमि के फैसले का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि धारा 36, आप उपयोगकर्ता द्वारा बना सकते हैं, संपत्ति की कोई आवश्यकता नहीं है. मान लीजिए कि यह मेरी अपनी संपत्ति है और मैं इसका उपयोग करना चाहता हूं, मैं पंजीकरण नहीं करना चाहता.सीजेआई ने कहा कि पंजीकरण में क्या समस्या है?सिब्बल ने कहा कि मैं कह रहा हूं कि उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ को समाप्त कर दिया गया है, यह मेरे धर्म का अभिन्न अंग है, इसे राम जन्मभूमि फैसले में मान्यता दी गई है.सिब्बल ने कहा कि समस्या यह है कि वे कहेंगे कि यदि वक्फ 300 साल पहले बनाया गया है तो वे डीड मांगेंगे.सिब्बल ने कहा कि धारा 7(ए) का हवाला देते हुए, इसमें 20 साल लगेंगे. सीजेआई ने कहा लेकिन यथास्थिति बरकरार रखी जाएगी. क्या कलेक्टर का फैसला न्यायालय के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आता है? सिब्बल ने कहा कि कानून की धारा ऐसा नहीं कहती.कपिल सिब्बल ने कहा कि कानून की धारा 61 देखिए. वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने कहा कि यह कानून इस्लाम धर्म की अंदरूनी व्यवस्था के खिलाफ है. धवन ने कहा कि संवैधानिक हमले का आधार यह है कि वक्फ इस्लाम के लिए आवश्यक और अभिन्न अंग है. धर्म, विशेष रूप से दान, इस्लाम का आवश्यक और अभिन्न अंग है.

अन्य पहलुओं में मैं सिब्बल के तर्क का समर्थन करता हूं. पहले सीईओ मुस्लिम होना चाहिए था, अब ऐसा नहीं है.सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्षकारों ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक वक्फ कानून पर रोक लगे.जस्टिस विश्वनाथन ने कहा, ट्रस्ट का उदाहरण न दें. सबसे अधिक संभावना हिंदू बंदोबस्ती की होगी. हिंदू समुदाय ही इसका प्रशासन करता है.मेहता ने कहा कि वो किसी भी तरीके से शासित होते हैं लेकिन अंततः यह वैधानिक द्वारा शासित होता है.सीजेआई ने कहा कि हमें एक उदाहरण दें.मेहता ने कहा ठीक है इस पर नहीं जाते हैं.सीजेआई ने कहा कि मेहता जी, जब बात हिंदुओं की बंदोबस्ती की आती है तो यह स्पष्ट हो जाना चाहिए कि यह आम तौर पर हिंदुओं की बंदोबस्ती है.मेहता ने कहा कि मेरे संकलन पर आते हैं. 2025 अधिनियम से पहले पंजीकृत मौजूदा वक्फ, वक्फ संपत्ति के रूप में बने रहेंगे लेकिनअगर कोई कहता है, हम पंजीकृत नहीं है, केवल विवादों में रहने वाली संपत्तियों को छोड़कर सब बने रहेंगे.सीजेआई ने कहा कि यह वक्फ संपत्ति क्यों नहीं रहेगी? सिविल कोर्ट को यह तय करने दें.सीजेआई ने कहा कि अधिकांश मामलों में, जैसे कि जामा मस्जिद, इसे उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ किया जाएगा.मेहता ने कहा कि उन्हें पंजीकरण करने से किसने रोका?जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि सीजेआई क्या कह रहे हैं, क्या होगा यदि धारा 3(सी) शामिल है और सरकार कहती है कि यह उनकी संपत्ति है? भूमि अतिक्रमण अधिनियम में कानून कहता है कि वास्तविक मसले पर अदालत द्वारा विचार किया जाएगा.मेहता ने कहा, मुझे जवाब पूरा करने दें.

एसजी तुषार मेहता ने कहा, ऐसे फैसले हैं जो कहते हैं कि सरकार ट्रस्टी के रूप में इसे विनियमित कर सकती है. अगर कोई सवाल उठता है कि क्या संपत्ति सरकारी संपत्ति है तो कलेक्टर यह निर्धारित करेगा, यह प्रावधान क्यों आया? ताकि कोई विवाद नहीं कर सके क्योंकि सरकारी संपत्ति सरकारी संपत्ति के अलावा कुछ नहीं हो सकती.सीजेआई ने कहा कि ऐसे में तो आप पहले किसी भी आगे की घोषणा को रद्द करें कि संपत्ति एक वक्फ संपत्ति है.एसजी तुषार मेहता ने कहा, सरकारी जमीन पर राजस्व के लिए न्यायिक निर्णय होना चाहिए. जेसीपी के समक्ष तर्क यह था कि कलेक्टर राजस्व अधिकारी है, उसके ऊपर एक अधिकारी होना चाहिए.सीजेआई ने कहा कि प्रावधान पढ़ें, कलेक्टर ने जैसे ही जांच करने की बात कही, क्या यह उचित है?मेहता ने कहा कि वक्फ के रूप में स्थिति अभी भी निलंबित है लेकिन कोई भी यह नहीं कहता कि उपयोग बंद हो जाएगा. ये राजस्व कार्यवाही है और अगर कोई प्रतिकूल कब्ज़ा चाहता है तो वे उपाय की मांग कर सकते हैं.सीजेआई ने कहा लेकिन सिविल मुकदमे पर रोक है.sg ने कहा कि मुझे पूरा करने दें.मेहता ने कहा कि धारा 81 देख लें. न्यायाधिकरण एक न्यायिक निकाय है, इसमें एक न्यायाधीश और मुस्लिम कानून की जानकारी रखने वाला एक व्यक्ति होता है. न्यायिक समीक्षा को समाप्त नहीं किया गया है.

जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि एसजी साहेब उपधारा 9 पढ़ें, हाईकोर्ट में अपील करें कि बात है.मेहता ने कहा कि मैं आभारी हूं, पहले ट्रिब्यूनल का का यह निर्णय अंतिम था. अब यह अधिक विस्तृत हो गया है.सीजेआई ने कहा कि मुझे अभी भी मेरा जवाब नहीं मिल पाया है.मेहता ने कहा कि अगर यह पंजीकृत है तो मुझे हलफनामे पर रखा जाएगा.सीजेआई ने कहा कि यह कानून द्वारा स्थापित किसी चीज को खत्म करना होगा. आप कैसे पंजीकृत करेंगे? उप-धारा 2 पर आइए. जहां तक उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ का सवाल है, इसे पंजीकृत करना मुश्किल है. आपकी बात सही है, इसका दुरुपयोग किया जाता है लेकिन आप यह नहीं कह सकते कि उपयोगकर्ता द्वारा कोई वास्तविक वक्फ नहीं है. अगर आप उपयोगकर्ता संपत्तियों द्वारा वक्फ की पहचान करते हैं तो यह एक समस्या होगी. उप-धारा 2 पर आइए, यह पूरी तरह से विपरीत है.सीजेआई ने कहा कि लेजिस्लेटिव अदालत के किसी निर्णय या डिक्री को अमान्य घोषित नहीं कर सकता. आप कानून के आधार को हटा सकते हैं लेकिन आप किसी निर्णय को बाध्यकारी नहीं घोषित कर सकते.मेहता ने कहा कि मुझे नहीं पता कि ये शब्द क्यों आए हैं. उस हिस्से को अनदेखा करें. मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग ऐसा है, जो मुस्लिम बोर्ड द्वारा शासित नहीं होना चाहता.

अगर कोई मुसलमान दान करना चाहता है तो वह ट्रस्ट के माध्यम से ऐसा कर सकता है.सनुवाई के दौरान कोर्ट में एसजी और सिब्बल के बीच थोड़ी बहस हुई. इस पर सीजेआई ने रोका. सीजेआई ने कहा कि पिछले वक्फ से जुड़े मुद्दे हैं.मेहता ने कहा कि सिब्बल कहते हैं कि ये केंद्र सरकार द्वारा पूरी तरह से हड़प लिया गया है. कृपया 1995 के अधिनियम में धारा 9 को देखें. 2013 के संशोधन के बाद भी हमेशा केंद्र सरकार ही नामांकन करती रही है.सीजेआई ने कहा कि हम एडजूडिकेशन की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि यह धर्म के संबंध में भी हैं.

एसजी ने कहा कि यहां मसला ये है कि सदस्य नॉन मुस्लिम क्यों है.सीजेआई ने कहा कि केवल 8 (मुस्लिम) हैं, हम एडजुडिकेशन के बारे में बात नहीं कर रहे हैं. ऐसे में वह अपना धर्म खो देते हैं. हम पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष हैं. हमारे लिए एक या दूसरा पक्ष समान है. अगर हम किसी धार्मिक मुद्दे से निपट रहे हैं तो यह मुद्दे उठेंगे. मान लीजिए हिंदू मंदिर में गवर्नर काउंसिल में सभी हिंदू हैं. आप न्यायाधीशों से कैसे तुलना कर रहे हैं? जो बोर्ड में नियुक्त किए जाते हैं.सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि क्या वह मुसलमानों को हिंदू धार्मिक ट्रस्टों का हिस्सा बनने की अनुमति देने को तैयार है.

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