सीजी भास्कर, 18 जून : राजधानी के एक प्रमुख आत्मानंद विद्यालय में शिक्षकों की कमी (Teacher Shortage) को लेकर खड़ा हुआ विवाद छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद सुलझ गया। विषयवार शिक्षकों के अभाव में विद्यार्थियों को स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) लेने की सलाह दिए जाने से नाराज छात्र कलेक्ट्रेट पहुंच गए और प्रदर्शन किया। छात्रों के दबाव और मामले के तूल पकड़ने के बाद शिक्षा विभाग ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए शिक्षकों की व्यवस्था करने का फैसला लिया। इस घटना ने प्रदेश में शिक्षकों की कमी (Teacher Shortage) की गंभीर समस्या को एक बार फिर सामने ला दिया है।
शिक्षक नहीं मिले तो छात्रों को दी गई थी टीसी लेने की सलाह
जानकारी के अनुसार, पिछले शैक्षणिक सत्र में विद्यालय में कला और वाणिज्य संकाय के विद्यार्थियों का प्रवेश लिया गया था। उस दौरान अस्थायी व्यवस्था के तहत शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। लेकिन नए सत्र की शुरुआत होते ही संबंधित विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं रहे। ऐसे में विद्यालय प्रबंधन ने छात्रों को दूसरे स्कूलों में प्रवेश लेने और टीसी प्राप्त करने की सलाह दी।
अचानक लिए गए इस निर्णय से छात्र-छात्राओं में नाराजगी फैल गई। विद्यार्थियों का कहना था कि प्रवेश लेने के बाद पढ़ाई शुरू हो चुकी है और ऐसे समय पर विषयों के लिए शिक्षक उपलब्ध नहीं होने की जानकारी देना उनके भविष्य के साथ अन्याय है।
कलेक्ट्रेट पहुंचा मामला, प्रदर्शन के बाद बदले हालात
शिक्षकों की कमी (Teacher Shortage) को लेकर छात्र बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान विभिन्न छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी उनका समर्थन किया। प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया और तत्काल समाधान के निर्देश दिए।
अधिकारियों की पहल के बाद विद्यालय में पूर्व में कार्यरत शिक्षक को पुनः नियुक्त करने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही छात्रों को आश्वस्त किया गया कि उनकी पढ़ाई प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। शिक्षा विभाग के हस्तक्षेप के बाद स्कूल में शैक्षणिक गतिविधियां फिर से सामान्य होने लगी हैं।
प्रदेशभर में बनी हुई है शिक्षकों की कमी की चुनौती
यह मामला केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं है। प्रदेश के कई सरकारी और आत्मानंद विद्यालयों में शिक्षकों की कमी (Teacher Shortage) लंबे समय से बड़ी चुनौती बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राज्य में सीधी भर्ती के 30 हजार से अधिक पद रिक्त हैं, जिनमें सहायक शिक्षक, व्याख्याता, प्रयोगशाला सहायक और कृषि शिक्षक जैसे पद शामिल हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर शैक्षणिक वातावरण के लिए रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियां जरूरी हैं। वहीं अभिभावकों और छात्रों ने भी मांग की है कि सरकार स्थायी समाधान निकाले, ताकि भविष्य में किसी भी विद्यालय में विद्यार्थियों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।





