सीजी भास्कर, 03 अगस्त। छत्तीसगढ़ की सियासत में एक प्रशासनिक विवाद अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच (Brijmohan Agrawal) गया है। रायपुर सांसद और प्रदेश के एक वरिष्ठ अधिकारी के बीच कथित फोन बातचीत को लेकर उठे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। अब इस मामले में लोकसभा सचिवालय की ओर से भी कार्रवाई शुरू होने से राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
मामले को लेकर सत्ता और विपक्ष दोनों की नजरें आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं। लोकसभा अध्यक्ष को शिकायत मिलने के बाद संबंधित मंत्रालय से पूरे घटनाक्रम की तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी।

लोकसभा पहुंचा सांसद बृजमोहन अग्रवाल और अमित कटारिया विवाद Brijmohan Agrawal
रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल और छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया के बीच कथित फोन वार्ता का मामला अब लोकसभा पहुंच गया है। सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर स्वास्थ्य सचिव पर विशेषाधिकार हनन का आरोप लगाया है।
शिकायत मिलने के बाद लोकसभा सचिवालय ने कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय से पूरे मामले पर हिंदी और अंग्रेजी में तथ्यात्मक रिपोर्ट यानी फैक्टुअल नोट मांगा है। यह रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
सांसद ने अभद्र व्यवहार का लगाया आरोप
बृजमोहन अग्रवाल का कहना है कि उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से जुड़े जनहित के मुद्दों और अपने संसदीय क्षेत्र की समस्याओं को लेकर कई बार स्वास्थ्य सचिव को पत्र और स्मरण पत्र भेजे, लेकिन लंबे समय तक कोई जवाब नहीं मिला।
शिकायत के अनुसार 20 मई को प्रमुख सचिव से चर्चा के बाद स्वास्थ्य सचिव ने उन्हें फोन किया। बाद में कॉल बैक के दौरान लंबित मामलों पर बातचीत में कथित रूप से उनसे जो करना है कर लो कहा गया और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया।
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विशेषाधिकार हनन का लगाया आरोप Brijmohan Agrawal
सांसद ने इस पूरे घटनाक्रम को संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत सांसदों को प्राप्त विशेषाधिकारों का उल्लंघन बताया है। उन्होंने मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजने और संबंधित अधिकारी के खिलाफ सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की मांग की है।
भूपेश बघेल की प्रतिक्रिया, सचिव के जवाब का इंतजार
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि किसी निर्वाचित सांसद के साथ किसी प्रशासनिक अधिकारी का व्यवहार इस प्रकार का होता है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है। उन्होंने इसे मतदाताओं के सम्मान से जुड़ा मामला भी बताया।
फिलहाल लोकसभा सचिवालय ने संबंधित मंत्रालय से विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट (Brijmohan Agrawal) मांगी है। वहीं स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया और मुख्य सचिव का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। उनके जवाब के बाद मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।
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