सीजी भास्कर, 17 सितंबर। एकीकृत भुगतान प्रणाली यानी यूपीआई के कुछ व्यापारी लेनदेन (Digital Payment) पर नए शुल्क को लेकर कांग्रेस नेता विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि महंगाई और बेरोजगारी के बीच व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने से इसका असर आखिरकार आम लोगों पर भी पड़ सकता है।
नई व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर से 2 हजार रुपए से अधिक के चुनिंदा व्यक्ति से व्यापारी वाले यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा। 75 हजार रुपए या उससे अधिक के लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपए तक रहेगा। सरकार के अनुसार यह शुल्क ग्राहक से नहीं लिया जाएगा और करीब 96 प्रतिशत व्यापारी लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे।

व्यापारी पर शुल्क को लेकर सवाल Digital Payment
विनोद चंद्राकर ने कहा कि सरकार को ऐसे समय में राहत देने पर ध्यान देना चाहिए, जब आम लोग महंगाई का सामना कर रहे हैं। उन्होंने यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लगाने के फैसले को लेकर सरकार की नीति पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि सरकार भले ही यह कह रही है कि शुल्क व्यापारी देगा, लेकिन व्यापारियों पर बढ़ने वाली लागत का असर कारोबार और कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि सरकार ने बैंकों को निर्देश दिया है कि एमडीआर का बोझ सीधे ग्राहकों पर न डाला जाए।
नकद भुगतान बढ़ने की आशंका
चंद्राकर ने कहा कि छोटे दुकानदार और कारोबारियों के लिए अतिरिक्त शुल्क परेशानी बढ़ा सकता है। उनके मुताबिक यदि व्यापारियों की लागत बढ़ती है तो कुछ कारोबारी डिजिटल भुगतान के बजाय नकद भुगतान को प्राथमिकता दे सकते हैं।
हालांकि, नई व्यवस्था में छोटे व्यापारियों के लिए भी कुछ लेनदेन शून्य एमडीआर दायरे में रखे गए हैं। सरकार के अनुसार हर महीने 1 लाख रुपए तक यूपीआई क्यूआर से प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारी इस शुल्क से बाहर रहेंगे।
ग्राहक से सीधे शुल्क नहीं लिया जाएगा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि एमडीआर कोई सरकारी कर नहीं है। यह भुगतान व्यवस्था में शामिल बैंकों और सेवा प्रदाताओं के बीच वितरित होने वाला शुल्क है। व्यक्ति से व्यक्ति यानी पी2पी यूपीआई भुगतान किसी भी राशि पर मुफ्त रहेगा।
विनोद चंद्राकर ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। वहीं नई व्यवस्था को लेकर सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य यूपीआई प्रणाली को लंबे समय तक टिकाऊ बनाना और उसके संचालन, सुरक्षा तथा विस्तार की लागत को संभालना है।
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