भोपाल। दहेज प्रथा पर कानूनी रोक लगे भले ही छह दशक से ज्यादा हो चुके हों, लेकिन यह कुप्रथा अब भी समाज को अंदर से खोखला कर रही है।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और राज्य सरकार के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश में हर दिन कम से कम एक महिला दहेज की भेंट चढ़ रही है।
18 महीने में 719 मौतें
राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत किए गए आंकड़ों ने गंभीर स्थिति उजागर की है। जुलाई 2023 से जून 2025 तक के सिर्फ 18 महीनों में 719 महिलाओं की मौत दहेज के कारण हुई है।
इनमें से 2023 में 21 मामले दर्ज हुए, 2024 में यह संख्या बढ़कर 459 पर पहुंची, जबकि 2025 के शुरुआती छह महीनों (जनवरी-जून) में ही 239 मौतें दर्ज की गईं।
निक्की हत्याकांड के बाद बढ़ा आक्रोश
ग्रेटर नोएडा में 28 वर्षीय निक्की भाटी की दहेज मांग को लेकर हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया। इसी बीच मध्यप्रदेश के ये ताजा आंकड़े सामने आने से लोगों में और गुस्सा बढ़ा है।
समाजशास्त्रियों का कहना है कि दहेज हत्या की घटनाएं केवल आंकड़े नहीं, बल्कि हर दिन उजड़ते घर और टूटते परिवारों की हकीकत हैं।
क्या कहता है कानून?
भारतीय कानून में दहेज हत्या उस स्थिति को कहा जाता है, जब विवाह के सात साल के भीतर महिला असामान्य परिस्थितियों में मारी जाए और उसके पीछे दहेज उत्पीड़न का सबूत मिले।
दोषी को कम से कम सात साल की सजा और अधिकतम आजीवन कारावास का प्रावधान है। बावजूद इसके, आंकड़े बताते हैं कि कड़े कानून भी इस सामाजिक बुराई को पूरी तरह खत्म नहीं कर पाए हैं।
समाज के लिए चेतावनी
विशेषज्ञों का मानना है कि दहेज हत्या केवल कानून का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक सोच की समस्या है। जब तक समाज की मानसिकता नहीं बदलेगी, तब तक कानून अकेला इस प्रथा को समाप्त नहीं कर सकता।