सीजी भास्कर, 28 अप्रैल । देशभर में बढ़ती गर्मी के बीच वैज्ञानिकों ने वर्ष 2026 में सुपर अल-नीनो की आशंका जताई है। यदि यह स्थिति बनती है तो इसका असर केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ सकता है। तापमान में तेज बढ़ोतरी, कमजोर मानसून और सूखे जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं, जिससे जनजीवन और कृषि पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है। (The threat of a super El Nino)
क्या है अल-नीनो और सुपर अल-नीनो
अल-नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान बढ़ने से होती है। जब तापमान सामान्य से 0.5 से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ता है तो इसे सामान्य अल-नीनो कहा जाता है। वहीं तापमान 2 डिग्री या उससे अधिक बढ़ने पर इसे सुपर अल-नीनो माना जाता है। यह स्थिति अधिक शक्तिशाली होती है और मौसम में बड़े बदलाव ला सकती है।
भारत पर संभावित असर : The threat of a super El Nino
सुपर अल-नीनो की स्थिति में भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे बारिश में कमी आ सकती है। इससे सूखे का खतरा बढ़ जाता है और खेती पर नकारात्मक असर पड़ता है। इसके अलावा लू की घटनाएं बढ़ सकती हैं और तापमान सामान्य से काफी अधिक रह सकता है। इससे जल संकट और खाद्य उत्पादन पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
अल-नीनो और ला-नीना में अंतर
अल-नीनो के विपरीत ला-नीना स्थिति में समुद्र का तापमान सामान्य से कम हो जाता है। ला-नीना के दौरान भारत में आमतौर पर अच्छी बारिश होती है और मानसून मजबूत रहता है। हालांकि कई बार अत्यधिक बारिश के कारण बाढ़ जैसी स्थिति भी बन सकती है। दोनों ही घटनाएं वैश्विक जलवायु को प्रभावित करती हैं और इनके प्रभाव अलग-अलग रूप में सामने आते हैं। (The threat of a super El Nino)


