सीजी भास्कर, 25 मई। दिल्ली के लाल किला मैदान में सोमवार को ऐसा माहौल दिखा जहां देशभर की जनजातीय परंपराएं एक साथ (Tribal Culture) नजर आईं। अलग अलग राज्यों से पहुंचे हजारों लोग पारंपरिक वेशभूषा में कार्यक्रम स्थल पर जुटे तो पूरा परिसर लोकधुनों और सांस्कृतिक रंगों से भर गया। भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर आयोजित इस बड़े समागम ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा।
कार्यक्रम में जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपरा और अधिकारों को लेकर कई अहम बातें सामने आईं। मंच से दिए गए संबोधनों के दौरान जनजातीय जीवन शैली, भाषा और परंपराओं को बचाने पर खास जोर दिया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे।
जनजातीय समाज को बताया भारत की असली पहचान : Tribal Culture
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जनजातीय समाज केवल जल जंगल और जमीन से जुड़ा समुदाय नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का जीवंत स्वरूप है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया पर्यावरण संकट से जूझ रही है और ऐसे समय में जनजातीय जीवन शैली संतुलित विकास का रास्ता दिखा सकती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति से जुड़ी हुई है। राज्य में कई जनजातियां आज भी अपनी परंपराओं और मूल संस्कृति को सहेजकर आगे बढ़ा रही हैं।
बिरसा मुंडा और वीर नारायण सिंह को किया याद
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भगवान बिरसा मुंडा और वीर नारायण सिंह के संघर्ष और योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन जननायकों ने समाज को अपनी पहचान और अधिकारों के लिए लड़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जनजातीय समाज के विकास और सांस्कृतिक संरक्षण को लेकर लगातार काम कर रही है।
जनजातीय भाषाओं को बचाने की कोशिश
कार्यक्रम के दौरान जनजातीय भाषाओं और परंपराओं के संरक्षण पर भी विस्तार (Tribal Culture) से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोंडी, हल्बी और सादरी जैसी भाषाओं में बच्चों को शुरुआती शिक्षा देने की दिशा में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि नया रायपुर में आदि परब, बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों के जरिए जनजातीय प्रतिभाओं को मंच दिया जा रहा है। वहीं देवगुड़ी और मातागुड़ी जैसे पारंपरिक आस्था केंद्रों के संरक्षण का काम भी तेजी से चल रहा है।
लोकनृत्य और पारंपरिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
कार्यक्रम में देशभर से पहुंचे कलाकारों ने लोकनृत्य और लोकसंगीत की शानदार प्रस्तुतियां दीं। लाल किला मैदान मांदर, ढोल और पारंपरिक धुनों से देर तक गूंजता रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए गंभीर प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि समाज के भीतर यह चर्चा बढ़ (Tribal Culture) रही है कि जो लोग अपनी मूल जनजातीय परंपराओं से पूरी तरह दूर हो चुके हैं, उनके संबंध में अनुसूचित जनजाति सूची को लेकर पुनर्विचार होना चाहिए ताकि वास्तविक लाभ जरूरतमंद समुदायों तक पहुंच सके।



