Tribal Hostel Negligence : गरियाबंद जिले के भाठीगढ़ स्थित शासकीय आदिवासी बालक आश्रम बड़ेगोबरा से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ बीमार छात्र के समय पर इलाज न होने के कारण उसकी मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया, वहीं अपने इकलौते बेटे को खोने वाले माता-पिता सदमे में हैं।
इलाज में देरी, कई दिनों तक अनसुनी रही छात्र की गुहार
मिली जानकारी के अनुसार, छात्र राघव कुमार मंडावी पिछले कई दिनों से अस्वस्थ था। उसने आश्रम कर्मचारियों और अधीक्षक को अपनी तबीयत खराब होने की जानकारी दी और बार-बार माता-पिता से बात कराने की गुहार लगाई, लेकिन उसकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। यही लापरवाही आगे चलकर जानलेवा साबित हुई।
गणतंत्र दिवस पर पिता ने देखी बेटे की बिगड़ती हालत
26 जनवरी को जब छात्र के पिता फिरतु राम मंडावी आश्रम पहुँचे, तो उन्होंने अपने बेटे को बेहद कमजोर हालत में बिस्तर पर पड़ा देखा। पिता से बात करते हुए छात्र ने सबके सामने बताया कि वह कई दिनों से बीमार है, लेकिन किसी ने इलाज की व्यवस्था नहीं की। उसी दिन पिता उसे छुट्टी लेकर घर ले गए।
अस्पताल ले जाने के बाद भी नहीं बच सकी जान
घर पर प्राथमिक इलाज के बाद भी जब हालत में सुधार नहीं हुआ, तो छात्र को धमतरी स्थित बठेना अस्पताल ले जाया गया। तमाम कोशिशों के बावजूद शुक्रवार तड़के करीब 4 बजे छात्र राघव मंडावी ने दम तोड़ दिया। इस घटना ने आश्रम व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

‘समय पर इलाज होता तो बेटा जिंदा होता’ — पिता
बिलखते हुए पिता फिरतु राम मंडावी ने कहा कि उनका बेटा परिवार की एकमात्र संतान था। उन्होंने भरोसे के साथ उसे आवासीय आदिवासी आश्रम भेजा था, ताकि वह पढ़-लिखकर परिवार का सहारा बन सके। पिता का कहना है कि अगर आश्रम प्रबंधन समय रहते इलाज करवा देता, तो आज उनका बेटा जिंदा होता।
आश्रम अधीक्षक की सफाई पर उठे सवाल
आश्रम अधीक्षक राकेश साहू ने सफाई देते हुए कहा कि 17 जनवरी को चिरायु दल द्वारा बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया था, उस समय छात्र की तबीयत सामान्य थी। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि इसके बाद छात्र की बिगड़ती हालत को नजरअंदाज क्यों किया गया।
जांच की मांग, दबाव बनाने के आरोप
घटना के बाद क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिजनों का आरोप है कि मामले को दबाने के लिए कागजी कार्रवाई तेज कर दी गई है और उन्हें बयान न देने का दबाव भी बनाया जा रहा है। इन आरोपों ने पूरे प्रकरण को और गंभीर बना दिया है।
सिस्टम पर फिर उठा बड़ा सवाल
एक गरीब आदिवासी परिवार का सपना, एक होनहार छात्र और एक बदहाल व्यवस्था—यह घटना सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि सिस्टम की असफलता की कहानी है। अब सवाल यह है कि क्या इस मामले में जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी, या फिर यह भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।


