सीजी भास्कर, 22 जून : उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की सुरक्षा (UGC Campus Safety) को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC Campus Safety) ने देशभर के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से परिसर में आवारा कुत्तों की रोकथाम तथा सुरक्षा प्रबंधन को लेकर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। जिन संस्थानों ने अब तक जानकारी नहीं भेजी है, उन्हें 10 जुलाई 2026 तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस निर्देश के दायरे में बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय तथा जिले के सभी शासकीय और निजी महाविद्यालय भी शामिल हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और परिसर में किसी भी प्रकार की दुर्घटना रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाना आवश्यक है।
उच्च शिक्षण परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC Campus Safety) ने सभी संस्थानों से आवारा कुत्तों की रोकथाम, निगरानी व्यवस्था और छात्र सुरक्षा उपायों की जानकारी मांगी है। रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तिथि 10 जुलाई निर्धारित की गई है।
पहले भी जारी हो चुके हैं निर्देश
आयोग की ओर से जारी स्मरण पत्र में बताया गया है कि इस संबंध में दिसंबर 2025 और अप्रैल 2026 में भी दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इसके बावजूद कई संस्थानों द्वारा निर्धारित प्रारूप में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इसी कारण अब दोबारा निर्देश जारी कर लंबित रिपोर्ट शीघ्र भेजने को कहा गया है।
बिलासपुर जिले के लगभग 130 शिक्षण संस्थानों को परिसर सुरक्षा, पशु नियंत्रण, छात्र आवाजाही वाले क्षेत्रों की निगरानी और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था की समीक्षा करनी होगी। कैंपस सुरक्षा ऑडिट (Campus Security Audit) के तहत संस्थानों को संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, शिकायत निवारण प्रणाली, प्रवेश नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्थाओं का मूल्यांकन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट की चिंता से शुरू हुई पहल
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान बच्चों और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई थी। न्यायालय ने शिक्षण परिसरों सहित सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा उपाय मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया था। इसी के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
बिलासपुर के लिए क्यों अहम है यह कदम
बिलासपुर को प्रदेश का प्रमुख शैक्षणिक केंद्र माना जाता है, जहां प्रतिदिन हजारों विद्यार्थी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में आते-जाते हैं। ऐसे में परिसर और आसपास सुरक्षित वातावरण बनाए रखना संस्थानों और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग के निर्देशों के बाद सुरक्षा समीक्षा, निगरानी तंत्र और स्थानीय निकायों के समन्वय को नई गति मिलेगी, जिससे विद्यार्थियों के लिए अधिक सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण तैयार हो सकेगा।





