सीजी भास्कर, 18 सितंबर। देशभर के 900 से अधिक शोधकर्ताओं और गणितज्ञों ने यूजीसी से अपील की है कि गणित स्नातक पाठ्यक्रम (UGC Math Curriculum) के नए मसौदे को तत्काल वापस लिया जाए। उनका तर्क है कि इस मसौदे में कई गंभीर कमियां हैं और यदि इसे लागू किया गया तो आने वाली कई पीढ़ियों के छात्रों पर इसका नकारात्मक असर पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि पिछले महीने यूजीसी ने गणित समेत नौ विषयों के स्नातक पाठ्यक्रम का ड्राफ्ट जारी किया था और इस पर सुझाव मांगे थे।
गणितज्ञों का कहना है कि यूजीसी अध्यक्ष को भेजे गए प्रतिवेदन में स्पष्ट किया गया है कि मसौदे में बीजगणित, वास्तविक विश्लेषण और व्यावहारिक गणित जैसे बुनियादी विषयों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया है। यह छात्रों की बुनियादी समझ को कमजोर कर सकता है और उच्च शिक्षा तथा शोध की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।
गणितज्ञों की यह है आपत्ति
गणितज्ञों ने प्रतिवेदन में कहा कि व्यावहारिक गणित और बीजगणित को उचित महत्व नहीं दिया गया है। स्नातक पाठ्यक्रम (UGC Math Curriculum) में बीजगणित के कम से कम तीन कोर्स होने चाहिए, अन्यथा देश में गणित और वैज्ञानिक गतिविधियों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।
प्रोग्रामिंग, संख्यात्मक विधियों और सांख्यिकी जैसे महत्वपूर्ण व्यावहारिक विषयों को मुख्य पाठ्यक्रम से बाहर रखा गया है या फिर उन्हें केवल सतही रूप से शामिल किया गया है।
सांख्यिकी को एक ही कोर्स में जबरदस्ती समेट दिया गया है। जबकि सांख्यिकी, मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे पाठ्यक्रमों में अनुप्रयोग-आधारित प्रशिक्षण आवश्यक है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक बड़ा अवसर था, जिसे व्यर्थ गंवा दिया गया।
भारतीय ज्ञान परंपरा पर यूजीसी का जोर
यूजीसी द्वारा जारी गणित स्नातक पाठ्यक्रम (UGC Math Curriculum) में भारतीय ज्ञान परंपरा पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसमें काल गणना (पारंपरिक भारतीय समय गणना), भारतीय बीजगणित, पुराणों में वर्णित गणितीय अवधारणाओं और नारद पुराण से अंकगणित व ज्यामिति की तकनीकों को शामिल करने की सिफारिश की गई है। मसौदे में परावर्त्य योजयेत सूत्र जैसी वैदिक गणित पद्धतियों का उपयोग कर बहुपदों का विभाजन सिखाने का सुझाव भी दिया गया है।
गणितज्ञों का कहना है कि भारतीय परंपरा का अध्ययन निश्चित रूप से उपयोगी है, लेकिन इसे मुख्य पाठ्यक्रम में बुनियादी और आधुनिक विषयों की कीमत पर नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उनका मानना है कि इस तरह की संरचना छात्रों के लिए भ्रमित करने वाली और असंतुलित होगी।
पंचांग और शुभ मुहूर्त का समावेश
नए स्नातक गणित पाठ्यक्रम (UGC Math Curriculum) में पंचांग (भारतीय कैलेंडर) और शुभ मुहूर्त की अवधारणाओं को शामिल करने का प्रस्ताव किया गया है। इसमें बताया गया है कि पंचांग त्योहारों और धार्मिक अवसरों पर शुभ समय निर्धारित करने में कैसे मदद करता है।
इसके अलावा प्रस्तावित पाठ्यक्रम में खगोल विज्ञान, पौराणिक कथाओं और सांस्कृतिक धरोहर को भी जोड़ा गया है। उदाहरण के तौर पर इसमें प्राचीन वेधशालाओं, उज्जैन की प्रधान मध्याह्न रेखा और वैदिक समय इकाइयों—घटी और विघटी—की तुलना आधुनिक प्रणालियों जैसे ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) और भारतीय मानक समय (IST) से की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय परंपरा और आधुनिक गणित का मिश्रण रोचक हो सकता है, लेकिन इसे लागू करने का तरीका वैज्ञानिक दृष्टिकोण से संतुलित होना चाहिए। केवल पौराणिक और सांस्कृतिक पक्ष पर जोर देने से छात्रों की वैज्ञानिक सोच कमजोर हो सकती है।
आगे की राह
गणितज्ञों ने यह भी कहा कि अगर मसौदा पाठ्यक्रम (UGC Math Curriculum) को वर्तमान रूप में लागू किया गया तो भारत में गणित शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने यूजीसी से इसे वापस लेकर नए सिरे से विशेषज्ञों की सलाह के साथ एक संतुलित पाठ्यक्रम तैयार करने की अपील की है।
शिक्षा जगत के जानकारों का कहना है कि गणित जैसी बुनियादी विषयवस्तु में गहराई और आधुनिक उपयोगिता का होना आवश्यक है। अगर यह पाठ्यक्रम छात्रों को शोध और अनुप्रयोग की दिशा में प्रेरित नहीं करेगा तो शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्य अधूरे रह जाएंगे।





