सीजी भास्कर, 03 जुलाई : मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर Username Feature (यूजरनेम फीचर) को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। WhatsApp के बाद अब इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Telegram और Signal को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सरकार ने इन प्लेटफॉर्म्स से पूछा है कि Username Feature (यूजरनेम फीचर) के जरिए होने वाले साइबर फ्रॉड, फर्जी पहचान (इम्पर्सनेशन) और ऑनलाइन दुर्व्यवहार को रोकने के लिए उन्होंने क्या सुरक्षा व्यवस्था की है।
WhatsApp के बाद Telegram और Signal भी सरकार के रडार पर
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार पहले ही WhatsApp पर Username Feature (यूजरनेम फीचर) लागू करने को लेकर अपनी आपत्ति जता चुकी है। मंत्रालय का मानना है कि जब तक इस फीचर से जुड़े गोपनीयता और सुरक्षा संबंधी सभी पहलुओं का व्यापक मूल्यांकन पूरा नहीं हो जाता, तब तक इसे लागू नहीं किया जाना चाहिए। इसी क्रम में अब Telegram और Signal से भी विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा गया है।
साइबर फ्रॉड और फर्जी पहचान को लेकर बढ़ी चिंता
सरकार का कहना है कि Username Feature (यूजरनेम फीचर) का दुरुपयोग कर साइबर अपराधी किसी भी प्रसिद्ध व्यक्ति, सरकारी अधिकारी, कारोबारी या आम नागरिक की फर्जी पहचान बनाकर लोगों को आसानी से ठग सकते हैं। इससे फिशिंग, ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी, बैंकिंग फ्रॉड और तथाकथित Digital Arrest (डिजिटल अरेस्ट) जैसे साइबर अपराधों में तेजी आने की आशंका है।
फोन नंबर छिपाने वाली सुविधा पर भी सवाल
Telegram और Signal पहले से ऐसी सुविधा उपलब्ध कराते हैं, जिसमें उपयोगकर्ता अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना केवल यूजरनेम के जरिए बातचीत कर सकते हैं। मंत्रालय का मानना है कि इससे जहां एक ओर उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता बढ़ती है, वहीं दूसरी ओर अपराधियों को अपनी वास्तविक पहचान छिपाने का अवसर भी मिल सकता है। इसी वजह से सरकार ने दोनों प्लेटफॉर्म्स से पूछा है कि इस सुविधा को जारी रखने का आधार क्या है और इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए कौन-कौन से सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं।
सरकार ने मांगी सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी
केंद्र सरकार ने नोटिस में कंपनियों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि फर्जी अकाउंट, इम्पर्सनेशन, ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराधों की शिकायत मिलने पर उनकी कार्रवाई की प्रक्रिया क्या है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि संदिग्ध अकाउंट की पहचान, सत्यापन और हटाने के लिए कौन-सी तकनीकी व्यवस्था अपनाई जा रही है।



