सीजी भास्कर 5 दिसंबर Voter List Irregularities: गुजरात में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया ने चुनावी सिस्टम की खामियों को फिर सामने ला दिया है।
जांच में पता चला कि राज्य की मौजूदा वोटर लिस्ट में 17 लाख से ज्यादा ऐसे नाम शामिल हैं, जिनके बारे में रिकॉर्ड में “मृत” दर्ज है।
यह खुलासा प्रशासन के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
4 नवंबर से शुरू हुआ अभियान — बूथ लेवल ऑफिसर्स ने घर–घर बांटे फॉर्म
मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार,
4 नवंबर से BLO टीमों ने अपने–अपने क्षेत्रों में ए뉴मरेशन फॉर्म बांटने की प्रक्रिया शुरू की।
यह अभियान 11 दिसंबर तक जारी रहेगा।
इस दौरान 5 करोड़ से अधिक मतदाताओं तक फॉर्म पहुंचाए जा चुके हैं।
Voter List Irregularities: 33 जिलों में 100% फॉर्म वितरण—12 विधानसभा क्षेत्रों का डिजिटाइजेशन पूरा
बीते एक महीने में कई जिलों ने तेज़ी से काम किया है।
अधिकांश जिलों में फॉर्म वितरण का काम 100% पूरा बताया गया है।
अब तक 182 विधानसभा क्षेत्रों में से 12 सीटों पर डिजिटाइजेशन का काम पूरा हो चुका है।
इनमें धनेरा, थराद, लिमखेड़ा, दाहोद (ST), बायड, धोराजी, जसदन, गोंडल, खंभात, केशोद, जलालपोर और मेहमादाबाद शामिल हैं।
डांग जिला सबसे आगे—94.35% डिजिटाइजेशन पूरा
राज्य चुनाव आयोग ने बताया कि गुजरात का डांग जिला इस पूरी प्रक्रिया में सबसे आगे है।
यहां वापस आए दस्तावेज़ों में से 94.35% रिकॉर्ड पूरी तरह डिजिटाइज हो चुका है, जो पूरे राज्य में सबसे ज्यादा है।
यह आंकड़ा यह दिखाता है कि छोटे जिलों में भी चुनावी पारदर्शिता को लेकर बढ़ती जागरूकता दिखाई दे रही है।
Voter List Irregularities: वोटर लिस्ट में हैरान करने वाली स्थितियां — मृत, गायब और माइग्रेटेड वोटरों की भरमार
एसआईआर प्रक्रिया के दौरान सामने आए तीन बड़े तथ्य इस प्रकार हैं—
- 17 लाख से अधिक मृत मतदाता लिस्ट में अब भी सक्रिय दिख रहे हैं।
- 6.14 लाख से ज्यादा लोग अपनी रजिस्टर्ड लोकेशन पर नहीं मिले।
- 30 लाख से ज्यादा लोग स्थायी रूप से माइग्रेट (Voter List Irregularities) कर चुके हैं।
यह आंकड़े बताते हैं कि चुनाव आयोग के डाटा में अपडेट की गति, असल परिस्थितियों से काफी पीछे चल रही है।
3.25 लाख ‘डुप्लीकेट’ वोटर मिले—एक से अधिक कार्ड जारी
एक और गंभीर पैटर्न जो सामने आया है, वह है डुप्लीकेट वोटरों की मौजूदगी।
एसआईआर में BLO टीमों ने 3.25 लाख से अधिक ऐसे वोटर चिन्हित किए, जिनके नाम एक से ज्यादा जगहों पर दर्ज थे।
कुछ के एक से अधिक वोटर कार्ड भी पाए गए हैं।
यह स्थिति न केवल डाटा की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है, बल्कि फर्जी मतदान की संभावनाओं को भी जन्म देती है।




