सीजी भास्कर 19 अप्रैल
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में हुए वेदांता पावर प्लांट हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है। बीते 24 घंटे में तीन और गंभीर रूप से झुलसे मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 13 घायलों का इलाज अभी जारी है। हादसे में कुल 36 मजदूर झुलसे थे। शुरुआती जांच में प्लांट के संचालन और मेंटेनेंस में गंभीर लापरवाही सामने आई है, जिसके बाद कंपनी के चेयरमैन समेत 10 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
FIR पर उठे सवाल, पहले जांच की मांग
उद्योग जगत से इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसमें कहा गया कि बिना पूरी जांच के शीर्ष प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। यह भी सवाल उठाया गया कि अन्य सरकारी संस्थानों में हादसों के दौरान शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई कम ही देखने को मिलती है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री ने भी FIR की प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
मेंटेनेंस में लापरवाही और तकनीकी खामी बनी कारण
जांच में सामने आया है कि बॉयलर के फर्नेस में अधिक मात्रा में फ्यूल जमा हो गया था, जिससे अचानक दबाव बढ़ा और विस्फोट हो गया। दबाव 1 से 2 सेकेंड के भीतर तेजी से बढ़ा, जिससे सिस्टम को नियंत्रित करना संभव नहीं रहा। इसके अलावा उत्पादन बढ़ाने के लिए कम समय में लोड को 350 मेगावाट से लगभग 590 मेगावाट तक बढ़ाया गया था। मशीनों की निगरानी, रखरखाव और सुरक्षा मानकों में कमी भी हादसे की बड़ी वजह मानी जा रही है।
जांच के घेरे में ऑपरेशन और जिम्मेदार अधिकारी
प्लांट के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभाल रही एजेंसी की भूमिका जांच के केंद्र में है। प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों, साइट इंचार्ज और मेंटेनेंस टीम की जिम्मेदारी तय की जा रही है। मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए हैं, जिसमें घटना के कारण, जिम्मेदार व्यक्तियों और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के उपायों की जांच की जाएगी। मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता और नौकरी देने की घोषणा भी की गई है।



