सीजी भास्कर, 20 अप्रैल : कोरिया जिले के जंगलों में छिपे कोयला माफियाओं के खिलाफ अब सरकार ने आर-पार की जंग छेड़ दी है। खनिज संपदा की लूट और जमीन के भीतर ‘मौत की सुरंग’ बनाने वाले गिरोहों पर नकेल कसते हुए रायपुर की सेंट्रल फ्लाइंग स्क्वाड ने धावा बोला है। प्रशासन ने अब साफ कर दिया है कि केवल जब्ती से काम नहीं चलेगा, बल्कि अब गुनाहगारों और उनके ठिकानों पर (Strict Action against Illegal Mining) के तहत सीधा प्रहार किया जाएगा। इस कार्रवाई ने कोयलांचल में हड़कंप मचा दिया है और माफियाओं के अवैध कारोबार की जड़ें हिल गई हैं।
पाताल चीरकर बनाई गई सुरंगें होंगी नेस्तनाबूद
देवखोल और भालूमाड़ा के दुर्गम पहाड़ों के बीच माफियाओं ने अपनी समानांतर सत्ता चला रखी थी। रविवार को जब सेंट्रल फ्लाइंग स्क्वाड की टीम इन इलाकों में पहुंची, तो वहां का मंजर देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। माफियाओं ने जमीन के सीने को चीरकर 150 मीटर से भी लंबी सुरंगें बना ली थीं। इस जघन्य अपराध को रोकने के लिए प्रशासन ने (Strict Action against Illegal Mining) अपनाते हुए अब इन सभी अवैध खदानों को ‘ब्लास्टिंग’ कर हमेशा के लिए दफन करने का आदेश जारी कर दिया है। यह संदेश स्पष्ट है: माफिया की हर चाल अब बारूद के ढेर पर है।
150 मीटर गहरे ‘डेथ ट्रैप’ का पर्दाफाश
शनिवार को देवखोल के जंगलों में शुरू हुआ यह ऑपरेशन रविवार को और भी ज्यादा आक्रामक हो गया। जांच दल जब इन संकरी और खतरनाक सुरंगों के भीतर दाखिल हुआ, तो वहां अवैध खनन का पूरा कारखाना मिला। प्रशासन ने (Strict Action against Illegal Mining) को अंजाम देते हुए मौके से 6 टन से ज्यादा कोयला बरामद किया। यह सुरंगें इतनी लंबी थीं कि वहां ऑक्सीजन की कमी के बावजूद सैकड़ों मजदूर जान जोखिम में डालकर कोयला निकाल रहे थे। यदि समय रहते यह (Strict Action against Illegal Mining) नहीं होती, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता था।
सुरंगों के भीतर से जब्त किए गए सामान
विद्युत तंत्र : अवैध रूप से बिछाए गए बिजली के तारों का जाल और हैवी-ड्यूटी विद्युत पंप।
खनन सामग्री : सुरंग बनाने में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक उपकरण, गेती और फावड़ा।
रसद : अवैध पाइपलाइन और पानी निकासी के लिए उपयोग किए जाने वाले फुटबॉल पाइप।
चार जिलों की फोर्स ने घेरा माफिया का गढ़
कोयला माफिया को संभलने का मौका न देते हुए इस बार प्रशासन ने ‘इंटर-डिस्ट्रिक्ट’ चक्रव्यूह रचा। इस (Strict Action against Illegal Mining) में कोरिया के साथ-साथ सूरजपुर, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और जीपीएम (GPM) जिले के खनिज अधिकारियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। जब चार जिलों की पुलिस और राजस्व टीम ने एक साथ जंगलों में दबिश दी, तो माफिया अपना सामान छोड़कर भागने पर मजबूर हो गए। यह एकजुटता दर्शाती है कि अब अपराधियों के पास भागने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं बचा है।

अवैध साम्राज्य का अंत
अधिकारियों ने रणनीति बदलते हुए अब ‘परमानेंट क्लोजर’ पर ध्यान केंद्रित किया है। अक्सर माफिया पाटी गई खदानों को दोबारा खोद लेते थे, लेकिन इस बार (Strict Action against Illegal Mining) के तहत सख्त निर्देश दिए गए हैं कि सभी चिन्हित स्थलों को डायनामाइट से उड़ा दिया जाए। इससे न केवल अवैध खनन रुकेगा, बल्कि भविष्य में इन सुरंगों के कारण होने वाले भू-धंसाव के खतरे को भी टाला जा सकेगा।
निगरानी का अभेद्य किला और SECL के साथ तालमेल
प्रशासन ने इस बार माफियाओं की सप्लाई लाइन काटने की योजना बनाई है। इसके लिए वन विभाग और खनिज विभाग के साथ-साथ एसईसीएल (SECL) के सुरक्षा अमले को भी मैदान में उतारा गया है। क्षेत्र में चेक पोस्ट बढ़ा दिए गए हैं और ड्रोन के जरिए जंगलों की निगरानी की जा रही है। इस (Strict Action against Illegal Mining) के बाद अब किसी भी ट्रक या अवैध वाहन का जंगल से निकलना नामुमकिन होगा।
अब जेल और जब्ती एक साथ
रायपुर से आए अधिकारियों ने कड़े लहजे में कहा है कि यह तो बस शुरुआत है। अवैध खनन, परिवहन और भंडारण में संलिप्त सफेदपोश लोग भी अब रडार पर हैं। आने वाले दिनों में यह (Strict Action against Illegal Mining) और भी ज्यादा धारदार होगी। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा पर डाका डालने वालों का स्थान केवल जेल की सलाखों के पीछे होगा। कोरिया कलेक्टर और पुलिस प्रशासन की इस संयुक्त स्ट्राइक ने साबित कर दिया है कि जब कानून सक्रिय होता है, तो माफियाओं के हौसले पस्त होने में देर नहीं लगती।



