सीजी भास्कर, 20 अप्रैल : छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल (हाउसिंग बोर्ड) में फाइलों पर कुंडली मारकर बैठने वाले अफसरों (Accountability in Governance) के खिलाफ आयुक्त ने ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की है। तिफरा अभिलाषा परिसर के एक फ्लैट का नामांतरण सालभर तक लटकाने के मामले में कार्यपालन अभियंता (ईई) और एक वरिष्ठ सहायक को पद से बेदखल कर दिया गया है।
यह कार्रवाई उस चर्चित ‘बादाम प्रदर्शन’ का नतीजा है, जिसमें पीड़ित युवक तोरण साहू ने दफ्तर की टेबल पर बादाम बिखेरकर अधिकारियों को याददाश्त बढ़ाने का आईना दिखाया था। इस अनोखे विरोध का वीडियो वायरल होते ही विभाग में शासन की जवाबदेही को लेकर हड़कंप मच गया और उच्चाधिकारियों को एक्शन लेने पर मजबूर होना पड़ा।
यह विवाद तिफरा स्थित ईडब्ल्यूएस फ्लैट क्रमांक 41/483 के हस्तांतरण से जुड़ा है। तोरण साहू ने नामांतरण के लिए 17 मार्च 2025 को विधिवत आवेदन दिया था। जांच में जो सच सामने आया वह चौंकाने वाला था; 11 नवंबर 2025 को ही नामांतरण पूर्व सूचना प्रकाशन का पत्र तैयार हो चुका था और संपदा अधिकारी के हस्ताक्षर भी हो चुके थे। जावक शाखा से डिस्पैच नंबर (3131) मिलने के बावजूद, भ्रष्ट सिस्टम ने इस पत्र को हितग्राही तक पहुंचाने के बजाय अंधेरी फाइलों में कैद रखा।
एक साल से अधिक समय तक अधिकारियों की खुशामद करने के बाद, तोरण साहू ने 17 अप्रैल 2026 को मंडल कार्यालय में ‘बादाम भेंट’ कर सिस्टम पर करारा तंज कसा था। वीडियो के सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैलने के बाद रायपुर मुख्यालय हरकत में आया।
आयुक्त अवनीश कुमार शरण ने 18 अप्रैल को त्वरित जांच कराई, जिसमें प्रभारी संपदा अधिकारी (ईई) एलपी बंजारे और वरिष्ठ सहायक पूनम बंजारे मुख्य रूप से दोषी पाए गए। दोनों को तत्काल प्रभाव से उनके मूल पद पर नवा रायपुर मुख्यालय अटैच कर दिया गया है, ताकि दफ्तरों में (Accountability in Governance) का खौफ कायम रहे।
डिजिटल युग में भी ‘फाइल सिस्टम’ का काला खेल
आज के दौर में जब सरकार हर सेवा को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने का दावा कर रही है, हाउसिंग बोर्ड के बिलासपुर संभाग में अधिकारी हस्ताक्षरित आदेशों को फाइलों में दबाकर वसूली या लापरवाही का खेल खेल रहे थे। तोरण साहू का बादाम प्रदर्शन न होता, तो शायद यह पत्र कभी प्रकाश में ही नहीं आता। आयुक्त ने अपने कड़े आदेश में स्पष्ट किया है कि जावक (Dispatch) होने के बाद भी पत्र रोकना गंभीर अपराध है, जो सरकारी तंत्र में (Accountability in Governance) के प्रति घोर उदासीनता को दर्शाता है।
इंटरनेट मीडिया बना ‘जनता की अदालत’
यह कार्रवाई इस बात का जीवंत प्रमाण है कि इंटरनेट मीडिया अब दफ्तरों की मनमानी के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार बन चुका है। बिलासपुर कार्यालय के अधिकारी रायपुर मुख्यालय से दूरी का फायदा उठाकर फाइलों को पेंडिंग रखने के आदी हो चुके थे। लेकिन एक छोटे से वीडियो ने पूरे मंडल की कार्यशैली को बेनकाब कर दिया। अब अफसरों को समझ आ गया है कि जनता की खामोशी को कमजोरी समझना भारी पड़ सकता है।


