सीजी भास्कर, 24 अप्रैल : हसदेव ताप विद्युत संयंत्र कोरबा पश्चिम (एचटीपीपी) में झाबू राखड़ बांध (Jhabu Ash Dam Breach) फूटने की घटना का असर अब राज्य के बिजली उत्पादन पर भी पड़ने लगा है। बांध की मरम्मत शुरू होने के कारण संयंत्र से निकलने वाली राख की आपूर्ति रोकनी पड़ी है, जिससे 210-210 मेगावाट क्षमता की दो इकाइयों को बंद कर दिया गया है (Korba Power Plant)। साथ ही इतनी ही क्षमता वाली अन्य इकाइयों का उत्पादन भी आधा कर दिया गया है। कुछ इकाइयां पूर्ण लोड पर नहीं चल रही हैं।
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी (सीजीपीजीसीएल) के एचटीपीपी संयंत्र में 210-210 मेगावाट की चार इकाइयां हैं। इनमें एक नंबर इकाई से 110 मेगावाट और दो नंबर इकाई से 130 मेगावाट बिजली उत्पादित की जा रही है, जबकि तीन और चार नंबर इकाइयों को बंद कर दिया गया है। वहीं 500 मेगावाट विस्तार परियोजना से 403 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है। बांध (Jhabu Ash Dam Breach) में रिसाव दूर करने के लिए युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य जारी है। तटबंध को मजबूत करने, रिसाव रोकने और निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने का काम चल रहा है। भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए राख रोकने जाली लगाने की तैयारी भी की जा रही है।
प्रबंधन ने 840 मेगावाट संयंत्र से निकलने वाली राख को झाबू की जगह डिंडोलभाठा राखड़ बांध में डायवर्ट कर दिया है। सीजीपीजीसीएल के संयंत्रों से 2900 मेगावाट की जगह 2053 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है। वहीं गर्मी के कारण राज्य में बिजली की मांग बढ़कर 6900 मेगावाट तक पहुंच गई है, जो अब तक की सर्वाधिक खपत है (Chhattisgarh Power Demand)। बीते वर्ष की तुलना में करीब 200 मेगावाट मांग बढ़ी है। उत्पादन और आपूर्ति के अंतर को संतुलित करने के लिए सेंट्रल सेक्टर से करीब 4819 मेगावाट बिजली ली जा रही है। अनुबंधित बिजली उपलब्ध होने से फिलहाल बिजली संकट की स्थिति नहीं बनेगी।
विशेषज्ञों की टीम आएगी आज
झाबू राखड़ बांध फूटने के मामले की जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम शुक्रवार को एचटीपीपी पहुंचेगी। टीम घटनास्थल का निरीक्षण कर बांध फूटने के कारणों की जांच करेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उपाय सुझाएगी ।
दो दिन में सामान्य होगा उत्पादन
मुख्य अभियंता एच.के. सिंह ने बताया कि झाबू राखड़ बांध पर दबाव कम करने के लिए उत्पादन घटाया गया है। शेष इकाइयां आधी क्षमता पर चलाई जा रही हैं और राख को अन्य बांध में भेजा जा रहा है। मरम्मत कार्य तेजी से चल रहा है और दो दिन में स्थिति सामान्य करने का प्रयास है।


