सीजी भास्कर, 26 अप्रैल : छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले का एक छोटा सा गांव ‘घुपसाल’ (Water Conservation Success) आज पूरे प्रदेश के लिए जल संरक्षण का रोल मॉडल बन चुका है। छुरिया विकासखंड के इस गांव के किसानों ने वो कर दिखाया है, जिसकी कल्पना अक्सर कागजों तक सीमित रह जाती है। गांव के किसानों ने एकजुट होकर रबी सीजन में धान जैसी ज्यादा पानी खपत वाली फसल को त्याग कर कम पानी वाली फसलों को अपनाया है। इस जल संरक्षण सफलता का परिणाम यह हुआ कि गांव का गिरता भू-जल स्तर न केवल रुक गया, बल्कि उसमें आश्चर्यजनक सुधार भी देखने को मिला है।
कलेक्टर ने खेतों में उतरकर थपथपाई पीठ
कलेक्टर जितेन्द्र यादव आज खुद छुरिया विकासखंड के ग्राम घुपसाल पहुंचे और किसानों द्वारा किए जा रहे इस क्रांतिकारी नवाचार का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने चिलचिलाती धूप में खेतों के बीच जाकर फसलों की स्थिति देखी और किसानों से उनके अनुभवों को साझा किया। कलेक्टर ने किसानों की सकारात्मक सोच की प्रशंसा करते हुए कहा कि कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली फसलों को अपनाना आज के समय की सबसे बड़ी मांग है। कलेक्टर के अनुसार, यह जल संरक्षण सफलता (Water Conservation Success) न केवल पर्यावरण के लिए जरूरी है, बल्कि इससे किसानों की लागत कम हुई है और उनकी शुद्ध आय में बढ़ोत्तरी हुई है।
सामूहिक निर्णय से बदला गांव का भाग्य
ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में गर्मी शुरू होते ही गांव के तालाब, हैंडपंप और नाले सूख जाते थे। मार्च के बाद पेयजल के लिए हाहाकार मच जाता था। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए ग्रामवासियों ने सामूहिक रूप से निर्णय लिया कि वे रबी में धान नहीं लगाएंगे। इस साल गांव के लगभग 350 एकड़ से अधिक रकबे में मक्का, दलहन और तिलहन जैसी फसलों का उत्पादन किया गया है। यह जल संरक्षण सफलता (Water Conservation Success) आज धरातल पर दिख रही है। जहां पिछले सालों में फागुन बीतते ही तालाब सूख जाते थे, वहां इस साल अप्रैल के अंत में भी निस्तारी के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध है।
सूखे की आहट के बीच ‘घुपसाल’ ने जगाई उम्मीद
राजनांदगांव जैसे इलाकों में जहां भू-जल स्तर एक बड़ी चुनौती है, वहां घुपसाल के किसानों की यह जल संरक्षण सफलता (Water Conservation Success) एक नई उम्मीद लेकर आई है। किसानों ने बताया कि मक्का और दलहन की खेती से उन्हें अब सिंचाई की चिंता नहीं रहती और कम मेहनत में बेहतर मुनाफा मिल रहा है। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण वैष्णव और सीईओ सुश्री सुरूचि सिंह ने भी किसानों के इस मॉडल की सराहना की। प्रशासन अब इस जल संरक्षण सफलता (Water Conservation Success) वाले मॉडल को जिले के अन्य गांवों में भी लागू करने की योजना बना रहा है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने माना कि अगर घुपसाल की तरह हर गांव (Water Conservation Success) जल संरक्षण को अपनी प्राथमिकता बना ले, तो आने वाले समय में भीषण गर्मी के दौरान भी पानी की किल्लत को खत्म किया जा सकता है। यह जल संरक्षण सफलता (Water Conservation Success) साबित करती है कि जब किसान और प्रशासन मिलकर काम करते हैं, तो प्रकृति भी अपना भरपूर आशीर्वाद देती है। यहां (Water Conservation Success) के किसानों का जज्बा आज पूरे छत्तीसगढ़ के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है।


