सीजी भास्कर, 27 अप्रैल : निजी स्कूलों द्वारा शिक्षा को व्यापार बनाने की कोशिशों पर प्रशासन ने कड़ा प्रहार किया है। कलेक्टर बीएस उइके और पुलिस अधीक्षक नीरज चंद्राकर ने आज जिला कार्यालय के सभाकक्ष में अशासकीय स्कूलों की ‘क्लास’ ली। इस उच्चस्तरीय बैठक में फीस वृद्धि से लेकर सुरक्षा मानकों तक के लिए सख्त (Private School Guidelines) जारी किए गए हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि छात्रों के भविष्य और पालकों की जेब से खिलवाड़ करने वाले संस्थानों को बख्शा नहीं जाएगा।
फीस का ‘खेल’ अब नहीं चलेगा
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में बैठक में कलेक्टर ने सबसे कड़ा रुख फीस वृद्धि को लेकर अपनाया। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि किसी भी स्कूल को अपनी मर्जी से फीस बढ़ाने का अधिकार नहीं है। बिना पूर्व अनुमति के शुल्क में बढ़ोत्तरी करना कानूनन अपराध की श्रेणी में आएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि हर हाल में (Private School Guidelines) के तहत प्रत्येक स्कूल में ‘फीस विनियमन समिति’ का गठन होना चाहिए।
कलेक्टर उइके ने चेतावनी दी कि एक सत्र में 8 प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी। यदि कोई स्कूल इससे अधिक शुल्क लेना चाहता है, तो उसे जिला स्तरीय समिति के सामने ठोस कारण प्रस्तुत कर अनुमति लेनी होगी। शिकायत मिलने पर न केवल जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि स्कूल की मान्यता पर भी गाज गिर सकती है।
RTE और ‘अपार आईडी’ पर सख्त निर्देश
शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत गरीब बच्चों को प्रवेश देने में आनाकानी करने वाले स्कूलों को कलेक्टर ने कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि आरटीई के तहत पात्र बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित करना स्कूलों की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है। इसके साथ ही, विद्यार्थियों की डिजिटल प्रोफाइलिंग के लिए (Private School Guidelines) के अनुसार शत-प्रतिशत ‘अपार आईडी’ बनाने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने कहा कि यह आईडी छात्र के शैक्षणिक करियर की चाबी है, इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कमीशनखोरी का तंत्र होगा ध्वस्त
अभिभावकों पर खास दुकानों से किताबें और ड्रेस खरीदने का दबाव बनाने की शिकायतों पर कलेक्टर ने सख्त हिदायत दी। उन्होंने कहा कि स्कूल प्रबंधन किसी विशेष वेंडर के एजेंट के रूप में काम न करें। विद्यालय केवल एनसीईआरटी और सीबीएसई की पुस्तकें ही चलाएं। गणवेश के नाम पर होने वाली उगाही को रोकने के लिए आदेश दिया गया कि ड्रेस का कपड़ा बाजार में सामान्य रूप से उपलब्ध होना चाहिए और इसे बार-बार नहीं बदला जाना चाहिए। ये (Private School Guidelines) पालकों को आर्थिक शोषण से बचाने के लिए बनाई गई हैं।
सुरक्षा में चूक मतलब स्कूल बंद
विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रहा है। स्कूल परिसर में खेल मैदान, हवादार कमरे और छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालयों का होना अनिवार्य कर दिया गया है। फायर सेफ्टी ऑडिट और इमरजेंसी एग्जिट जैसे सुरक्षा मानकों को पूरा न करने वाले स्कूलों पर ताला भी लग सकता है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि बच्चों का जीवन किसी भी मुनाफे से बढ़कर है, इसलिए (Private School Guidelines) का पालन अनिवार्य है।
सड़कों पर दौड़ते ‘मौत के सौदागरों’ पर लगाम
स्कूल बसों और वैन की खटारा स्थिति पर कलेक्टर ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने आदेश दिया कि परिवहन विभाग के 16 बिंदुओं वाले फिटनेस टेस्ट को पास किए बिना कोई भी बस सड़क पर नहीं दिखेगी। बसों में सीसीटीवी, जालीदार खिड़कियां, और वैध परमिट होना अनिवार्य है। यदि कोई स्कूल इन (Private School Guidelines) का उल्लंघन करता पाया गया, तो तत्काल वाहन जब्त कर स्कूल की मान्यता रद्द करने की अनुशंसा की जाएगी।
पुलिस की पैनी नजर और वेरिफिकेशन
पुलिस अधीक्षक नीरज चंद्राकर ने सुरक्षा व्यवस्था को और पुख्ता करते हुए कहा कि स्कूल संचालकों को अपने सभी ड्राइवरों, कंडक्टरों और सुरक्षा गार्डों का पुलिस वेरिफिकेशन कराना होगा। स्कूलों को अपने वाहनों की पूरी सूची नजदीकी थाने में जमा करनी होगी। छोटे वैन और ऑटो चालकों पर भी कड़ी निगरानी रखी जाएगी। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि सुरक्षा संबंधी ये (Private School Guidelines) बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए अनिवार्य हैं।
बैठक के समापन पर जिला शिक्षा अधिकारी जगजीत सिंह धीर ने समस्त निजी संस्था प्रमुखों को चेतावनी दी कि इन निर्देशों को केवल कागज तक सीमित न रखें। आने वाले सप्ताह से ही जिला प्रशासन की टीमें स्कूलों का औचक निरीक्षण शुरू करेंगी। प्रशासन के इस कड़े रुख से जिले के निजी स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया है, वहीं अभिभावकों ने इस पहल का स्वागत किया है। इन नई (Private School Guidelines) के लागू होने से जिले की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आने की उम्मीद है।


