सीजी भास्कर, 30 अप्रैल। सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों को लंबी और जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। रजिस्ट्रेशन से लेकर डॉक्टर की जांच, फिर जांच रिपोर्ट तक हर चरण में घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई बार तो रिपोर्ट मिलने तक डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहते, जिससे मरीजों को अगले दिन फिर से यही प्रक्रिया दोहरानी पड़ती है। (Treatment in government hospitals has become a challenge )
लंबी प्रक्रिया और इंतजार से बढ़ रही परेशानी : Treatment in government hospitals has become a challenge
अस्पताल पहुंचने के बाद मरीजों को पहले रजिस्ट्रेशन के लिए लंबी लाइन में लगना पड़ता है। इसके बाद डॉक्टर को दिखाने के लिए अलग कतार, फिर जांच के लिए नई लाइन और अंत में रिपोर्ट लेने के लिए फिर इंतजार करना पड़ता है। इस पूरी प्रक्रिया में कई घंटे लग जाते हैं, जिससे मरीजों की हालत और बिगड़ जाती है। कई मरीज दर्द में जमीन पर बैठकर या दीवार का सहारा लेकर अपनी बारी का इंतजार करते नजर आते हैं।
एक ही दिन में पूरा नहीं हो पाता इलाज
जांच और रिपोर्ट की प्रक्रिया इतनी लंबी होती है कि कई बार मरीज को उसी दिन डॉक्टर को दोबारा दिखाने का मौका नहीं मिल पाता। रिपोर्ट मिलने तक डॉक्टर का समय खत्म हो जाता है और मरीज को अगले दिन फिर अस्पताल आना पड़ता है। इससे न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि दूर-दराज से आए लोगों को अतिरिक्त आर्थिक और शारीरिक परेशानी भी झेलनी पड़ती है।
प्रबंधन की चुनौतियां और सुधार की जरूरत : Treatment in government hospitals has become a challenge
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण ओपीडी, जांच और रिपोर्टिंग में देरी होती है। गंभीर मरीजों को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन सामान्य मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। सेवाओं को बेहतर बनाने और प्रतीक्षा समय कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि मरीजों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सके।


