सीजी भास्कर,01 मई । मई की शुरुआत होते ही महंगाई ने आम लोगों को फिर चौंका (5kg LPG Cylinder Price ) दिया है। 5kg LPG cylinder price में अचानक आई तेज बढ़ोतरी ने खासकर शहरों में रहने वाले मजदूरों और छात्रों की चिंता बढ़ा दी है। सुबह से ही लोग गैस एजेंसियों के बाहर दाम पूछते नजर आए, और हर जगह एक ही चर्चा रही कि छोटू सिलेंडर अब आम आदमी की पहुंच से दूर होता जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर बात करें तो कई इलाकों में लोगों ने इसे सीधा बजट बिगाड़ने वाला फैसला बताया। रोज कमाकर खर्च चलाने वाले परिवारों का कहना है कि पहले ही राशन और किराए का दबाव था, अब गैस की कीमत बढ़ने से हालात और मुश्किल हो गए हैं। छोटे सिलेंडर पर निर्भर लोगों के लिए यह बढ़ोतरी किसी झटके से कम नहीं लग रही।
कीमतों में आई इस तेज उछाल के बाद 5 किलो वाला सिलेंडर अब काफी महंगा हो गया है। जानकारी के मुताबिक जो सिलेंडर पहले करीब 549 रुपये में मिल (5kg LPG Cylinder Price) रहा था, वही अब बढ़कर लगभग 810 रुपये तक पहुंच गया है। एक ही बार में 261 रुपये का इजाफा छोटे उपभोक्ताओं के लिए भारी साबित हो रहा है। इससे पहले दिन की शुरुआत में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के रेट में भी करीब 993 रुपये की बढ़ोतरी देखी गई, जिसके बाद राजधानी में इसकी कीमत 3071.50 रुपये के आसपास पहुंच गई।
छात्रों और मजदूरों पर असर (5kg LPG Cylinder Price)
छोटे सिलेंडर का सबसे ज्यादा इस्तेमाल वही लोग करते हैं जो अस्थायी रूप से शहरों में रहते हैं या अकेले जीवन गुजार रहे हैं। दूसरे राज्यों में काम करने गए मजदूर और किराए के कमरों में रहने वाले युवा इसी पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में 5kg LPG cylinder price बढ़ने से उनके महीने का खर्च सीधे बढ़ने वाला है।
वहीं पढ़ाई के लिए बाहर रह रहे छात्रों की स्थिति भी आसान नहीं है। पहले से ही फीस और रहने का खर्च संभालना मुश्किल होता है, अब गैस महंगी होने से खाना बनाना भी महंगा पड़ेगा। छोटे दुकानदार, ठेला चलाने वाले और ढाबा संचालकों के लिए भी यह बढ़ोतरी चिंता का कारण बन रही है क्योंकि रोजमर्रा के काम की लागत बढ़ेगी।
ईरान संकट का असर (5kg LPG Cylinder Price)
गैस के दामों में इस तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय हालात को वजह माना जा रहा है। खासकर ईरान से जुड़े तनाव ने वैश्विक बाजार में एलपीजी की सप्लाई पर असर डाला है। फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई के बाद से हालात और बिगड़े बताए जा रहे हैं।
इसका असर धीरे धीरे भारत में भी दिख रहा था, और अब ताजा बढ़ोतरी ने इसे और स्पष्ट कर दिया है। बड़े शहरों में पहले से ही लागत बढ़ने की वजह से मजदूरों का दबाव बढ़ा हुआ था, अब गैस के नए दामों ने मुश्किलों को और बढ़ा दिया है।


