सीजी भास्कर 9 मई I कोरबा जिले के भैसमा तहसील अंतर्गत ग्राम पतरापाली में आदिवासी किसानों की जमीन कथित बेनामी खरीद के जरिए हड़पने के प्रयासों के विरोध में किसान सभा ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। (Tribal Farmers’ Assembly protests)
आदिवासी बहुल गांव में बढ़ा जमीन विवाद : Tribal Farmers’ Assembly protests
पतरापाली एक आदिवासी बहुल गांव है, जहां अधिकांश ग्रामीण खेती-किसानी पर निर्भर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोग भूमि कानूनों की जानकारी नहीं होने का फायदा उठाकर उनकी पैतृक जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि वे पीढ़ियों से संबंधित जमीन पर खेती करते आ रहे हैं। पिछले करीब एक महीने से कुछ बाहरी लोग गांव पहुंचकर कृषि भूमि पर दावा कर रहे हैं और पंजीयन से जुड़े दस्तावेज दिखाकर जमीन खाली करने का दबाव बना रहे हैं।
‘1990 में जमीन खरीदी थी’ कहकर कर रहे दावा
ग्रामीणों के मुताबिक, जमीन पर दावा करने वाले लोगों को गांव का कोई भी व्यक्ति पहचानता तक नहीं है। बाहरी लोग यह कहते हुए जमीन अपनी बता रहे हैं कि उन्होंने वर्ष 1990 में ग्रामीणों के पूर्वजों से यह भूमि खरीदी थी।
मामला तब और गंभीर हो गया जब एक गैर-आदिवासी व्यक्ति ने सगे भाइयों मंगल सिंह और भूखन लाल को उनकी जमीन से बेदखल कर वहां घेराबंदी कर दी।
किसान सभा और सीटू ने उठाए सवाल
प्रदर्शन में किसान सभा के संयुक्त सचिव प्रशांत झा, जिला सचिव दीपक साहू और सीटू के राज्य महासचिव एस. एन. बनर्जी भी शामिल हुए। नेताओं ने आरोप लगाया कि इस तरह के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। (Tribal Farmers’ Assembly protests)
उन्होंने बताया कि वर्ष 1999 में भी इसी प्रकार के एक मामले में अनुविभागीय अधिकारी, कोरबा ने प्रकरण क्रमांक 8/अ-23/99-2000 में पीड़ित आदिवासी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए गैर-कानूनी भूमि अंतरण को निरस्त कर दिया था।
‘आदिवासी जमीन का अंतरण कानूनन प्रतिबंधित’
किसान नेताओं का कहना है कि जिन जमीनों को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है, उनमें 40 से 50 साल पुराने विक्रय का दावा किया जा रहा है, जबकि मूल भूस्वामी आज भी जमीन पर काबिज हैं और खेती कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आदिवासी भूमि का गैर-आदिवासियों को हस्तांतरण कानूनन प्रतिबंधित है। ऐसे में इन सौदों को फर्जी और बेनामी बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
प्रशासन ने जांच शिविर लगाने का दिया आश्वासन
ग्रामीणों के विरोध के बाद प्रशासन ने गांव में शिविर लगाकर भूमि स्वामित्व संबंधी विवादों की जांच और निराकरण कराने का आश्वासन दिया है।
वहीं किसान सभा और सीटू ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा। संगठनों ने आशंका जताई है कि पतरापाली ही नहीं, आसपास के अन्य गांवों में भी इस तरह के फर्जी भूमि सौदे हुए हो सकते हैं। इसलिए पूरे क्षेत्र में विशेष शिविर लगाकर भूमि सत्यापन कराने की मांग की गई है।


