सीजी भास्कर, 10 मई। देशभर में बढ़ते जल संकट के बीच छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़कर एक नई मिसाल पेश की है। “मोर गांव, मोर पानी” अभियान के जरिए गांवों को केंद्र में रखकर जल प्रबंधन की ऐसी पहल शुरू की गई, जिसने पानी बचाने को सिर्फ सरकारी योजना नहीं बल्कि जनआंदोलन का रूप दे दिया है। (Water conservation becomes a mass movement in CG)
राज्य के कई इलाकों में बदलते मौसम, सूखते जलस्रोत और घटते भूजल स्तर ने ग्रामीण जीवन को प्रभावित किया था। ऐसे में गांवों में लोगों को जागरूक कर जल संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बनाने की दिशा में अभियान शुरू किया गया। पंचायतों, महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीणों की भागीदारी से यह पहल लगातार मजबूत होती गई।
गांवों में संवाद और भागीदारी से बदली तस्वीर : Water conservation becomes a mass movement in CG
अभियान की शुरुआत गांव-गांव में बैठकों, प्रशिक्षण और संवाद कार्यक्रमों से की गई। लोगों को समझाया गया कि जल संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है। ग्राम सभाओं में जल संकट और समाधान को लेकर खुलकर चर्चा होने लगी।
व्यवहार परिवर्तन के लिए लोगों को जल संरक्षण की तकनीक, संसाधन और प्रेरणा उपलब्ध कराई गई। पंचायत भवनों की दीवारों पर भूजल स्तर की जानकारी लिखी गई, जिससे ग्रामीण समय-समय पर पानी की स्थिति को समझ सकें। इससे लोगों में जिम्मेदारी और जागरूकता दोनों बढ़ी।
मनरेगा और स्थानीय नवाचारों से मजबूत हुआ अभियान
मनरेगा और अन्य योजनाओं के जरिए गांवों में डबरी, तालाब, सोखता गड्ढे और जल संरचनाओं का निर्माण किया गया। अलग-अलग जिलों में स्थानीय जरूरतों के हिसाब से नवाचार भी सामने आए। कांकेर में आजीविका डबरी, कोरिया में “5 प्रतिशत मॉडल”, राजनांदगांव में इंजेक्शन वेल और दुर्ग में सोखता गड्ढों की पहल को लोगों ने अपनाया।
पिछले वर्ष राज्य में मनरेगा के तहत करीब 1300 करोड़ रुपए जल संरक्षण कार्यों पर खर्च किए गए। इसका असर यह रहा कि कम बारिश के बावजूद कई बांधों और जलस्रोतों में पर्याप्त पानी बना हुआ है। Water conservation becomes a mass movement in CG
महिलाओं और ग्रामीण परिवारों की भूमिका बनी सबसे बड़ी ताकत
अभियान में महिलाओं की भागीदारी को विशेष प्राथमिकता दी गई। जल संरक्षण कार्यों में महिला समूहों को जोड़ा गया और उनके योगदान को सार्वजनिक रूप से पहचान दी गई। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत बनाए जा रहे घरों में वर्षा जल संग्रहण प्रणाली को भी बढ़ावा दिया गया।
रायपुर के एनआईटी के सहयोग से कम लागत वाला रेन वाटर हार्वेस्टिंग मॉडल तैयार किया गया, जिसे ग्रामीणों ने तेजी से अपनाया। राज्य में अब एक लाख से अधिक घरों में वर्षा जल संग्रहण की व्यवस्था स्थापित की जा चुकी है।
विशेष रूप से आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में जल संरक्षण कार्यों से खेती और आजीविका दोनों को मजबूती मिली है। गांवों में पुनर्जीवित तालाब और भरे हुए कुएं अब इस बात का प्रमाण बन रहे हैं कि सामूहिक प्रयास से जल संकट का समाधान संभव है।


