सीजी भास्कर, 17 मई । बस्तर में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बनाए गए सीआरपीएफ कैंप अब धीरे-धीरे जनसुविधा केंद्रों में तब्दील किए जाएंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 18 मई को शहीद वीर गुंडाधुर के गांव नेतानार से इस पहल की शुरुआत करेंगे। (Security camps will be converted in Bastar)
योजना के तहत बस्तर में बने करीब 400 कैंपों को आने वाले एक साल में स्कूल, अस्पताल, आंगनबाड़ी और लघु वनोपज संग्रहण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। शुरुआत में कैंपों के आधे हिस्से में फोर्स और आधे हिस्से में जनसुविधाएं संचालित होंगी, बाद में फोर्स को अन्य स्थानों पर शिफ्ट किया जाएगा।
एक साल में हटेगी फोर्स, जनता के काम आएंगी इमारतें : Security camps will be converted in Bastar
सरकार की योजना के अनुसार जिन कैंपों में जनसुविधा केंद्र बनाए जाएंगे, वहां तैनात सुरक्षा बलों को दूसरे कैंपों या बेस कैंप में भेजा जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक बस्तर में 2024 से अब तक 110 नए सीआरपीएफ कैंप खोले गए हैं। पहले यहां 290 कैंप थे, जो अब बढ़कर 400 हो गए हैं। इन कैंपों को मजबूत संरचना के साथ तैयार किया गया है, जिनमें बैरक, बोरवेल और शौचालय जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। अब इन्हीं इमारतों का उपयोग स्थानीय लोगों के हित में किया जाएगा।
बस्तर से नक्सलवाद खत्म होने का संदेश
बस्तर में पहली बार 26वीं मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक आयोजित होने जा रही है। इस बैठक में छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शामिल होंगे। बैठक के जरिए सरकार यह संदेश देना चाहती है कि बस्तर में नक्सलवाद अब अंतिम दौर में है और विकास की नई शुरुआत हो रही है। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे।
शहीद गुंडाधुर के गांव से होगी नई पहल की शुरुआत : Security camps will be converted in Bastar
सरकार ने इस अभियान की शुरुआत नेतानार गांव से करने का फैसला किया है, जो भूमकाल विद्रोह के नायक शहीद वीर गुंडाधुर का गांव है। बस्तर में गुंडाधुर को आदिवासी समाज भगवान की तरह पूजता है। अधिकारियों के मुताबिक यह पहल बस्तर में विकास और विश्वास की नई शुरुआत का प्रतीक होगी। गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि कैंपों को जनसुविधा केंद्रों में बदलकर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी सुविधाएं गांवों तक पहुंचाई जाएंगी।



