सीजी भास्कर, 17 मई। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में राजस्व विभाग के भीतर जमीन के सीमांकन (Demarcating) और रकबा बैठाने के नाम पर बड़े पैमाने पर सौदेबाजी का गंभीर मामला सामने आया है। (Durg Revenue Department case)

पावर ऑफ अटॉर्नी होल्डर और शिकायतकर्ता रजत सुराना ने एक प्रेस नोट जारी कर राजस्व निरीक्षक विजय शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायतकर्ता का दावा है कि विवादित मामलों को जान बूझकर पेचीदा बनाकर चहेते लोगों की ‘टीम फॉर्मेशन’ की जाती है और फिर मनमुताबिक फैसले के लिए लाखों रुपये की डिमांड की जाती है।

क्या है पूरा मामला और खसरा नंबर 80/3 का विवाद?
शिकायतकर्ता रजत सुराना के मुताबिक उन्होंने वर्ष 2005 में पवन अग्रवाल नामक व्यक्ति से खसरा नंबर 80/3 की कुल 0.417 हेक्टेयर भूमि खरीदी थी। इसी खसरे से वर्ष 1994 से 2005 के बीच करीब 11 अन्य लोगों ने भी जमीनें खरीदीं।

सड़क की जमीन का विवाद : Durg Revenue Department case
इन भूमियों के बीच आवागमन के लिए विक्रेता पवन अग्रवाल द्वारा 30 फीट और 60 फीट चौड़ी सड़कें छोड़ी गई थीं, जो आज भी मौके पर मौजूद हैं लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में यह सड़क-रास्ता आज भी पवन अग्रवाल के मूल खसरा नंबर 80/3 में ही दर्ज है।

Durg Revenue Department case : राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल..!
आरोप है कि पवन अग्रवाल के पुत्र निलेश अग्रवाल, जो वर्तमान में वार्ड क्रमांक 06 से पार्षद और नगर निगम में MIC सदस्य हैं, अपने राजनीतिक प्रभाव और पैसे के दम पर उक्त सड़क-रास्ते की भूमि को शिकायतकर्ता की भूमि (खसरा नंबर 80/352) में जबरन समायोजित (बैठाने) कराने का प्रयास कर रहे हैं।
RI पर 25 लाख रुपये घूस मांगने का आरोप : Durg Revenue Department case
रजत सुराना (शिकायतकर्ता) का आरोप है कि RI विजय शर्मा द्वारा उनसे मामले को रफा-दफा करने और पक्ष में काम करने के एवज में 25 लाख रुपये की मांग की गई थी। जब उन्होंने मना किया तो स्पष्ट कहा कि ‘काम उसी के फेवर में होगा जो पैसे देगा’।
यही नहीं, रजत की आपत्तियों को रिकॉर्ड पर लेने या रिसीविंग देने से भी लगातार इनकार किया गया।
इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता ने मिलीभगत का एक बड़ा सबूत पेश करने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि 14 मई को कुछ लोगों ने मिलीभगत कर मीटिंग की और 15 मई को ही उक्त जमीन के सीमांकन की तारीख तय थी।
शिकायतकर्ता का कहना है कि सारे प्रामाणिक दस्तावेज सौंपने के बावजूद रात के अंधेरे में हुई यह मीटिंग पूरी तरह से पक्षपात और मिलीभगत को उजागर करती है।
शिकायत में शासन-प्रशासन से यह मांगें
शिकायतकर्ता रजत सुराना ने इस मामले की लिखित शिकायत सौंपते हुए प्रशासन से दुर्ग जिले में पिछले वर्षों में हुए सभी विवादित सीमांकन एवं रकबा बैठाने के मामलों की पुनः निष्पक्ष जांच कराने, RI विजय शर्मा को तत्काल इस प्रकरण से पृथक करने, वर्तमान सीमांकन प्रक्रिया पर तत्काल रोक, RI विजय शर्मा की कॉल डिटेल (CDR) और कॉल रिकॉर्डिंग की बारीकी से जांच, खसरा नंबर 80/3 की बचत भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में पृथक रूप से ‘सड़क-रास्ता’ घोषित करने की मांग की है।
रजत सुराना ने जिले के अन्य पीड़ित भू-स्वामियों से भी अपील की है कि यदि वे भी इस प्रकार के भ्रष्टाचार का शिकार हुए हैं, तो वे दस्तावेजों के साथ उनसे संपर्क करें ताकि इसका पर्दाफाश किया जा सके।
इस मामले के सामने आने के बाद अब देखना होगा कि दुर्ग जिला प्रशासन और राजस्व के उच्च अधिकारी इस पर क्या ठोस कार्रवाई करते हैं?



