सीजी भास्कर, 20 मई। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गैस वितरण में बड़ी गड़बड़ी की आशंका सामने आई है। बाजार आतरिया क्षेत्र स्थित साल्हेकला इंडियन गैस एजेंसी पर उपभोक्ताओं ने फर्जी डिलीवरी और कालाबाजारी के गंभीर आरोप लगाए हैं। (Possibility of irregularities in the Ujjwala scheme)
ग्रामीणों का कहना है कि एजेंसी कर्मचारी पहले उपभोक्ताओं से OTP मांगते हैं और सिस्टम में सिलेंडर डिलीवर दिखा दिया जाता है, लेकिन कई दिनों बाद भी गैस सिलेंडर घर तक नहीं पहुंचता।
उपभोक्ताओं के मुताबिक रिकॉर्ड में डिलीवरी पूरी दिखने के कारण उनके खातों में सब्सिडी की राशि भी पहुंच जाती है। हालांकि वास्तविकता में उन्हें सिलेंडर नहीं मिलता और वे लगातार एजेंसी के चक्कर लगाने को मजबूर हो जाते हैं।
फर्जी डिलीवरी और कालाबाजारी का आरोप : Possibility of irregularities in the Ujjwala scheme
ग्रामीणों ने दावा किया है कि कई उपभोक्ताओं के खातों में दो-दो और तीन-तीन बार सब्सिडी आई, लेकिन गैस सिलेंडर कभी नहीं मिला। इससे गैस वितरण व्यवस्था और विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सरकार ने कालाबाजारी रोकने के लिए OTP आधारित डिलीवरी सिस्टम लागू किया था, लेकिन अब उसी व्यवस्था का दुरुपयोग कर फर्जी डिलीवरी दिखाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि शिकायत करने पर एजेंसी की ओर से हर बार अलग-अलग बहाने बनाकर मामला टाल दिया जाता है।
घरेलू सिलेंडर कमर्शियल उपयोग में खपाने की आशंका
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि उपभोक्ताओं के नाम पर बुक किए गए घरेलू सिलेंडरों को होटल, ढाबों और छोटे व्यवसायों में खपाया जा रहा है। इससे एजेंसी को अधिक मुनाफा मिल रहा है, जबकि गरीब परिवारों तक गैस नहीं पहुंच पा रही।
साल्हेकला एजेंसी सीमावर्ती क्षेत्र में होने के कारण खैरागढ़ के साथ बेमेतरा और दुर्ग जिले के भी सैकड़ों उपभोक्ता इससे जुड़े हुए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि करीब 800 से 900 परिवार इस कथित गड़बड़ी से प्रभावित हो सकते हैं।
जांच के निर्देश, तकनीकी जांच से खुल सकते हैं राज : Possibility of irregularities in the Ujjwala scheme
मामले के सामने आने के बाद खैरागढ़ प्रशासन हरकत में आया है। एडीएम सुरेंद्र कुमार ठाकुर ने पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बिना सिलेंडर पहुंचे डिलीवरी पूरी कैसे दिखा दी गई। अगर उपभोक्ताओं को गैस नहीं मिली तो सब्सिडी किस आधार पर जारी हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि डिलीवरी रिकॉर्ड, ओटीपी एंट्री, वाहन मूवमेंट और वास्तविक वितरण की तकनीकी जांच से बड़े खुलासे हो सकते हैं।



