सीजी भास्कर, 21 मई : भीषण गर्मी के इस कड़कते मौसम में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (High Court Virtual Hearing) से एक बड़ी खबर सामने आई है। अमूमन काले कोट में पसीने से तर-बतर होकर कोर्ट के चक्कर काटने वाले वकीलों और अपने केस के लिए भटकने वाले पक्षकारों को अब इस चिलचिलाती धूप में अदालत की सीढ़ियां चढ़ने की कोई जरूरत नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के तीखे तेवरों और हालिया निर्देशों का असर अब छत्तीसगढ़ में भी साफ दिखने लगा है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के कड़े और सीधे निर्देश पर हाईकोर्ट प्रशासन ने एक ऐसा क्रांतिकारी सर्कुलर जारी कर दिया है, जिसके बाद समर वेकेशन (गर्मियों की छुट्टियों) के दौरान पूरी अदालत अब स्क्रीन पर सिमट जाएगी।
प्रशासनिक गलियारों से आई इस खबर का असली सस्पेंस यह है कि अब ईंधन और सरकारी संसाधनों की बर्बादी को रोकने के लिए अदालत ने बेहद कड़ा और आक्रामक रुख अपना लिया है। नए आदेश के मुताबिक, गर्मियों की छुट्टियों के दौरान अदालती कार्यवाही को सामान्य रूप से पूरी तरह से ऑनलाइन मोड (High Court Virtual Hearing) पर शिफ्ट कर दिया गया है। यानी अब जज साहब और वकील अपने घरों या दफ्तरों में बैठकर ही मुकदमों का फैसला करेंगे। हालांकि, जो वकील तकनीकी कारणों से वर्चुअली नहीं जुड़ पाएंगे, उन्हें ही सिर्फ व्यक्तिगत रूप से कोर्ट आने की ढील दी जाएगी, लेकिन इसके लिए भी कोर्ट की सख्त नजरें और शर्तें लागू रहेंगी।
इस बड़े प्रशासनिक बदलाव का असर सिर्फ वकीलों पर ही नहीं, बल्कि कोर्ट के स्टाफ पर भी कड़ाई से लागू होने जा रहा है। हाईकोर्ट और जिला अदालतों के कर्मचारियों के लिए अब ‘वर्क फ्रॉम होम’ का नया चक्रव्यूह तैयार किया गया है। रोटेशन ऐसा सेट किया गया है कि 50 फीसदी कर्मचारी घर से काम करेंगे, लेकिन उन्हें हर सेकंड फोन और सरकारी संचार माध्यमों पर मुस्तैद रहना होगा। जरा सी भी लापरवाही सीधे सस्पेंशन का रास्ता दिखाएगी।
सबसे बड़ा और आक्रामक कदम तो जजों और बड़े अफसरों के लिए उठाया गया है। अब रसूखदार अधिकारियों और जजों की गाड़ियों का काफिला सड़कों पर पेट्रोल-डीजल फूंकता नजर नहीं आएगा। फ्यूल बचाने के लिए जजों और रजिस्ट्री अफसरों को आपस में ‘कार पूलिंग’ यानी एक ही गाड़ी साझा करने का अल्टीमेटम दिया गया है।
हाईकोर्ट रजिस्ट्री को इस पूरे हाई-टेक सिस्टम (High Court Virtual Hearing) को बिना किसी तकनीकी गड़बड़ी के संचालित करने का सख्त जिम्मा सौंपा गया है। साफ संदेश है कि पर्यावरण संरक्षण और देशहित के इस बड़े मिशन में अगर कोई भी तकनीकी बाधा आई, तो जिम्मेदार अधिकारी सीधे नपेंगे। चीफ जस्टिस की इस नई और सख्त व्यवस्था (हाईकोर्ट वर्चुअल सुनवाई) ने साफ कर दिया है कि न्याय की रफ्तार अब मौसम की मार या संसाधनों की कमी से रुकने वाली नहीं है।



